नरेंद्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के मंत्री और आईएएस अधिकारी इन दिनों भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के आर्थिक-प्रशासनिक गुर एवं गुजरात के विकास पर लिखी पुस्तक "मोदीनोमिक्स-इनक्लुसिव इकॉनोमिक्स-इनक्लुसिव गवर्नेंस" पढ़ने लगे हैं।

यह किताब पिछले दो सप्ताह में राज्य सरकार के मंत्रियों, सचिवों एवं विभागाध्यक्षों के पास पहुंची है। वित्त एवं उद्योग विभाग में तो दूसरे दर्जे के अधिकारियों तक भी यह किताब पहुंची है।

गुजरात के एक प्रशासनिक अधिकारी एक निजी बैंक समूह के अधिकारी के साथ मंत्रियों एवं राज्य के आइएएस अधिकारियों से मिलकर यह पुस्तक भेंट कर रहे हैं। जून में शुरू होने वाले राज्य विधानसभा के बजट सत्र में यह पुस्तक विधायकों को दी जाएगी। माना जा रहा है कि गुजरात मॉडल की तरफ बढ़ते राज्य सरकार के रुझान के चलते योजनाओं के क्रियान्वयन में यह पुस्तक उपयोगी साबित होगी।

पुस्तक में मोदी की राजनीतिक यात्रा के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि गुजरात की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के साथ ही प्रदेश को विकसित करने के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र है। प्रशासनिक तंत्र के बारे में लिखा गया है कि गुजरात में मोदी के कार्यकाल के दौरान अधिकारियों के तबादले राजनीतिक आधार पर नहीं बल्कि काम के आधार पर किए गए हैं।

अधिकारियों को एक पद पर एक निश्चित समय तक रखने का भी प्रावधान है। मंत्रियों के साथ ही अधिकारियों की बात को भी तवज्जो दिए जाने का प्रावधान है। किताब में डेयरी और सहकारिता के क्षेत्र में गुजरात को देश के पहले स्थान पर लाने के लिए किए गए प्रयासों के साथ ही इससे हुए रोजगार सृजन के बारे में लिखा गया है। सहकारिता आंदोलन के बारे में भी संक्षिप्त लिखा गया है।

रोजगार सृजन के लिए कौशल वर्धन योजना के तहत रिलायंस, बिरला, महिन्द्रा सहित 36 हजार कंपनियों को गुजरात लाया गया। पिछले 10 वर्षों से गुजरात की विकास दर लगातार लगभग 10 प्रतिशत है। कृषि में लगातार 10 वर्षों में विकास दर 11.11 प्रतिशत होने एवं भूकंप से तबाह हुए गुजरात के हिस्सों को फिर से विकसित करने को लेकर मोदी द्वारा रणनीतिक रूप से उठाए गए कदमों के बारे में भी लिखा गया है।