भोपाल। हमीदिया अस्पताल के सर्जिकल वार्ड 4 में भर्ती राम भरोसी बाई की रीढ़ की हड्डी में एक साथ तीन ट्यूमर हैं। ट्यूमर ने नर्व (तत्रिकाओं) को इस कदर दबा लिया था कि रामभरोसी के दोनों पैर जाम हो गए थे। हमीदिया अस्पताल में चार डॉक्टरों की टीम ने उनकी सर्जरी की। अब वह खुद चल पा रही हैं।

अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. एके चौरसिया व डॉ. रजनीश गौर ने बताया कि महिला 6 जुलाई को मेडिसिन विभाग में भर्ती हुई थी। तीन दिन बाद उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में रेफर कर दिया गया।

यहां पर एमआरआई जांच में पता चला कि महिली की रीढ़ की हड्डी में एक साथ 3 ट्यूमर है। एक ट्यूमर हार्ट के नजदीक डी-9 में, दूसरा कमर के नीचे एल-2 व एल-3 के बीच व तीसरा एल-3 व एल-4 के बीच था।

तीनों ट्यूमर रीढ़ की हड्डी की एक परत ड्यूरा के भीतर थे। इन्हें इंट्रा ड्यूरल एक्सट्रा मेडुलरी (आईडीईएम) ट्यूमर कहा जाता है। यह ट्यूमर नसों से बनता है। डॉ.चौरसिया ने बताया कि यह ट्यूमर और बड़े होते तो पैर पूरी तरह से काम करना बंद कर देते।

महिला को दूसरी तरह की दिक्कतें भी शुरू हो जाती। सर्जरी के बाद महिला की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। आरएसओ डॉ. अगम शर्मा व डॉ. नीरज माने ने भी सर्जरी में सहयोग किया। उन्होंने बताया कि लगातार फिजियोथैरेपी के बाद महिला पूरी तरह से ठीक हो जाएगीं

एक साथ निकाले सभी ट्यूमर

डॉ. रजनीश गौर ने बताया कि एक साथ तीन ट्यूमर का केस पहली बार उनके सामने आया है। बड़ी बात यह है कि तीनों ट्यूमर एक साथ निकाले गए। सर्जरी में करीब चार घंटे लगे।

सर्जरी बड़ी सावधानी से करनी पड़ी। वजह, ट्यूमर नर्व से जुड़े हुए थे। सर्जरी के दौरान नर्व को नुकसान होने पर महिला का मल-मूत्र पर नियंत्रण खत्म हो सकता था। पैर भी सुन्न पड़ सकते थे।

इलाज में सालभर की देरी

रामभरोसी के परिजनों ने बताया कि सालभर पहले उसका दाहिना पैर कमजोर पड़ने लगा। इसके दो महीने बाद बाएं पैर में भी दिक्कत शुरू हो गई। उसके पैर कमजोर पड़ने लगे तो गांव लोगों ने कहा लकवा है। नारियल खेड़ा में एक डॉक्टर के यहां लकवा का इलाज कराते रहे। तकलीफ बढ़ी तो हमीदिया अस्पताल लेकर आए। यहां एमआरआई जांच के बाद पता चला कि ट्यूमर है।