-लुक इस्ट पॉलिसी के तहत एएसआई का अभियान

-कंबोडिया में करीब दो हजार शिव मंदिर

विजयालक्ष्मी, नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) कंबोडिया के मंदिरों के अभिलेखों का अनुवाद करने की तैयारी में जुटा है। इस अभियान से कंबोडिया और भारत के सांस्कृतिक संबंधों की जानकारी जुटाने में भी मदद मिलेगी । इसके साथ ही कंबोडिया के दो हजार मंदिरों पर लिखे शिलालेखों को भी संग्रहित किया जाएगा । एएसआई की अभिलेख शाखा ने इस संबंध में कुछ पुरातत्वविदों को ट्रेनिंग देने का काम शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि एएसआई कंबोडिया स्थित 'ता प्रोहम" मंदिर का जीर्णोद्धार कर रहा है । कंबोडिया में ही भगवान विष्णु का सबसे पुराना मंदिर है। अभिलेखों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1000 वर्ष पहले भारत से कई लोग कंबोडिया गए और वहां मंदिरों का निर्माण कराया। एएसआई के इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लुक इस्ट पॉलिसी के तहत कंबोडिया से भारत के संबंधों की जानकारी जुटाने के रूप में देखा जा रहा है।

1200 अभिलेखों का होगा अनुवाद

पुरातत्व विभाग के अभिलेख शाखा के प्रोफेसर सच्चिदानंद सहाय ने बताया कि कंबोडिया में करीब 1200 ऐसे अभिलेख मिले हैं, जिनका हिन्दी में अनुवाद किया जाना है। इन अभिलेखों में ज्यादातर अभिलेख संस्कृत भाषा में हैं और कुछ फ्रेंच भाषा में भी है। इसके अलावा वहां के करीब दो हजार मंदिरों में कई शिलालेख हैं, जिनको अभिलेखों में तब्दील किया जाना है।

पुराने अभिलेखों से हजार वर्ष पहले के करीब दस भारतीय लोगों की जानकारी जुटाई गई है, जो व्यापार के सिलसिले में वहां गए थे और फिर वहीं बस गए। इन अभिलेखों से इतिहास में पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों के बारे में जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।

अंगकोर वट सबसे पुराना मंदिर

इसके साथ कंबोडिया में एक प्राचीन शिव मंदिर भी था, जहां से 17 अभिलेख मिले थे, लेकिन उस मंदिर के अब कुछ अवशेष ही शेष रह गए हैं। इस मंदिर के इतिहास की भी जानकारी उन अभिलेखों में मिलेगी । इसी तरह विष्णु का प्राचीन मंदिन अंगकोर वट सबसे पुराना विष्णु का मंदिर है, वहां से भी कई अभिलेख मिले हैं, जिन्हें पढ़ने का काम शुरू किया जा रहा है।