युवराज गुप्ता, बुरहानपुर। वर्ष 1958 में देश के पहले हिंद केसरी पहलवान का खिताब जीतने वाले रामचंद्र केसरी आज दूसरों की मालिश व रोगियों का उपचार कर किसी तरह घर चला रहे हैं। 200 से ज्यादा पुरस्कार जीत चुके केसरी को पूर्व प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद भी अब तक 50 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।

नेपानगर के पुराने जर्जर मकान में पत्नी सीताबाई के साथ रह रहे 83 वर्षीय श्री केसरी आज भी युवाओं को कुश्ती के दांवपेंच सिखा रहे हैं। हालांकि अब वे अखाड़े नहीं जाते, लेकिन घर के आसपास रहने वाले युवाओं को स्वस्थ्य जीवन जीने की कला में पारंगत करते हैं। प्रशिक्षण देकर कई युवाओं को पहलवान बना चुके हैं।

250 से ज्यादा कुश्तियां लड़ीं

रामचंद्र पहलवान ने 1950 से 1965 तक 250 से ज्यादा कुश्तियां लडीं। 1992 तक नेपा मिल के अखाड़े में पहलवानों को कुश्ती के दांवपेंच सिखाए। करीब 40 साल के पहलवानी जीवन में उन्होंने छोटे-बड़े 100 से ज्यादा पहलवान तैयार किए। इनमें से रतन पहलवान, प्रताप पहलवान, घन्सुभाई पहलवान, मदनमोहन पहलवान आदि राज्य स्तर तक प्रतिभा दिखा चुके हैं।

पहली कुश्ती: ज्ञानीराम को पटखनी दी

हिंद केसरी भारतीय शैली की राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप है। यह ऑल इंडिया एमेच्योर रेसलिंग फेडरेशन (एआईएडब्ल्यूएफ) से संबद्ध है। 1958 में इसकी शुरुआत हुई थी। 1 जून 1958 को पहली स्पर्धा हैदराबाद के गोसा महल स्टेडियम में हुई थी।

इसमें रामचंद्र ने थल सेना के नामचीन पहलवान ज्ञानीराम को मात्र सात मिनट में पटखनी देते हुए हिंद केसरी का खिताब जीता था। 2011 से पहली बार महिला प्रतिभागियों को भी हिंद केसरी स्पर्धा में भाग लेने की अनुमति प्रदान की गई। श्री केसरी ने बाद में इंदौर के नामचीन पहलवान अमरसिंह, जबलपुर के हन्‍नू पहलवान, हैदराबाद के सुभान पहलवान आदि को भी पटखनी दी।

महाभारत में ऑफर हुआ था भीम का रोल

श्री केसरी के पिता बाबूलाल भी कुशल पहलवान थे। पिता की परंपरा को उन्होंने आगे बढ़ाया। रामचंद्र को फिल्म निर्माता बीआर चोपड़ा ने प्रसिद्ध टीवी सीरियल महाभारत में भीम के रोल के लिए चयनित किया था, लेकिन जिस दिन उन्हें मुंबई पहुंचना था, उसके एक दिन पूर्व पिता का देहांत हो गया। इसके चलते वे मुंबई नहीं जा सके।

प्रधानमंत्री कर चुके हैं सम्मानित

1981 में दिल्ली में हुए एशियाई गेम्स में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने श्री केसरी को सम्मानित करते हुए 50 एकड़ जमीन देने की घोषणा की थी। इसके बाद राजस्व विभाग ने नेपानगर क्षेत्र में जमीन का चयन भी किया, लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं में मामला अटक गया। 10 जून 2013 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने दो लाख का चेक देकर श्री केसरी का सम्मान किया था। रुस्तमे हिन्द स्व.दारासिंह के हाथों भी श्री केसरी सम्मानित हो चुके हैं।

कोरे आश्वासन मिले

आज भी पुराने जर्जर मकान में रह रहा हूं। बारिश के दिनों में छत टपकती है। पूर्व प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद मुझे अब तक जमीन नहीं मिल सकी। पेंशन और रेलवे पास के लिए भी मैंने गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब क्षेत्र के जनप्रतिनिधि राष्ट्रपति पुरस्कार दिलाने का आश्वासन दे रहे हैं। अब देखते हैं इस आश्वासन का क्या होता है?