रायपुर। कैंसर सहित अन्य जीवन शैली जनित रोगों से बढ़ रही मृत्युदर को कम करने के लिए केंद्र सरकार भले ही पैसा पानी की तरह बहा रही हो, पर मौतों का सिलसिला कम नहीं हो पा रहा है। छत्तीसगढ़ का ही उदाहरण लें तो यहां तीन वर्ष के भीतर इन बीमारियों से 48219 मौतें हुई हैं, जबकि इनकी रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने इन्हीं तीन वर्षों में 5808 लाख रुपए प्रदेश सरकार को दिए हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि केंद्र सरकार मौतों को रोकने के लिए गंभीर है तो अनवरत बढ़ोतरी क्यों हो रही है।

भारत सरकार का स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय कैंसर व जीवन शैली जनित बीमारियां मसलन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, श्वास संबंधी रोग से बढ़ रही मौतों को रोकने के लिए प्रदेश सरकारों के माध्यम से कई योजनाएं संचालित कर रहा है। जागरूकता के कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

ऐसे में मौतों का आंकड़ा बढ़ना समझ से परे है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक किए गए तीन वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ छत्तीसगढ़ में हर वर्ष मौत व मरीजों की संख्या बढ़ी है, जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाला धन दोगुने रफ्तार से बढ़ा है।

छत्तीसगढ़ में मिले मरीजों आंकड़ा

-वर्ष 2015 में 30239

-वर्ष 2016 में 31817

-वर्ष 2017 में 33477

छत्तीसगढ़ में हुई मौतों का आंकड़ा

-वर्ष 2015 में 15231

-वर्ष 2016 में 16030

-वर्ष 2017 में 16868

छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार से मिली रकम

-वर्ष 2015 में 847 लाख

-वर्ष 2016 में 1485 लाख

-वर्ष 2017 में 3469 लाख

- स्वास्थ्य चेतना, संरचना चेतना के प्रति जब तक लोग सजग व सर्तक नहीं होंगे तब तक मौत के सिलसिले को रोकना संभव नहीं है। देश में 80 फीसद मौतें जीवन शैली जनित बीमारियों से ही होती हैं। केंद्र सरकार द्वारा मिली राशि का व्यय व सदुपयोग व्यवस्था का विषय है। -डॉ.विवेक चौधरी, एचओडी कैंसर विभाग आंबेडकर हास्पिटल रायपुर