युवराज गुप्ता, बुरहानपुर। इस गणेशोत्सव ईकोफ्रेंडली प्रतिमाओं के रूप में विराजेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश और भक्तों को पर्यावरण की समृद्धि का आशीर्वाद देंगे। इस बार गणेश गमले में विराजमान होकर आ रहे हैं, जो गमले में विसर्जन के बाद पौधे के रूप में नवसृजन करेंगे। इस पहल की शुरुआत अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा की जा रही है। गायत्री परिवार द्वारा गणेशोत्सव पर मिट्टी की प्रतिमा के साथ विशेष तरह के गमले भी दिए जा रहे हैं। इन गमलों के ऊपर ही मिट्टी के गणेश की आकर्षक प्रतिमा एक पौधे के साथ रहेगी।

प्रतिमा का दस दिनों तक पूजन होगा और अनंत चतुर्दशी के दिन इसी गमले में इनका विसर्जन हो जाएगा। इससे गमले में लगा बीज सिंचित होगा और पौधे के रूप में पल्लवित होगा। बुरहानपुर, निवासी गायत्री परिवार के सदस्य बसंत मोंढे और मनोज तिवारी ने बताया इस बार 'ट्री गणेश या पर्यावरण विनायक' की अवधारणा को मूर्त रूप दिया जा रहा है।

गमले में विराजित की गई मूर्ति के बेस में खाद युक्त मिट्टी भरी गई है। इसमें भगवान श्रीगणेश की प्रिय दुर्वा घास लगाई है। मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा में बेल पत्र के बीज डालकर उन्हें गमले में स्थापित किया है। भक्तों से कहा गया है दो-तीन साल बाद जब यह पौधा बड़ा हो जाए तो किसी शिव मंदिर में इसे रोपें ताकि बेल पत्र भगवान शिव को अर्पित हो सकें।