युवराज गुप्ता, बुरहानपुर। विश्‍व में एकमात्र जीवित भूमिगत भू-जल संरचना बुरहानपुर के ऐतिहासिक कुंडी भंडारे (खूनी भंडारे) पर उचित रखरखाव के अभाव में खतरा मंडरा रहा है। 400 वर्ष पूर्व सतपुड़ा की पहाड़ियों से निकले भू-जल को सहेजकर निरंतर प्रवाहित रखने के लिए बनी इस अनूठी जल संरचना में जल स्तर लगातार गिर रहा है।

कैल्शियम से झीरियां बंद होने के चलते जलस्तर हर साल 20 फीट नीचे जा रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कुछ सालों में अविरल धारा बंद हो जाएगी।

यह खुलासा शहर के वरिष्ठ इंजीनियर एवं टाउन प्लॉनर सुधीर पारेख ने कुंडी भंडारे पर लिखी अपनी रिसर्च बुक में किया है। 'कन्जरवेशन एंड रेस्टोरेशन ऑफ एंसिएंट वॉटर रिसोर्स सिस्टम' शीर्षक की यह पुस्तक कुंडी भंडारे के सभी पहलुओं पर विस्तृत शोध के बाद लिखी गई है।

सतपुड़ा के पहाड़ों पर बारिश के समय रिसकर जमीन में संग्रहित होने वाले पानी को परकोलेशन के माध्यम से जमीन के 80 फीट नीचे सुनियोजित तरीके से नहरें निकाली गई हैं। इन नहरों में दीवारों के छिद्रों से भी लगातार पानी गिरता है जिससे उनमें पानी का बहाव बना रहता है।

यह संरचना उस समय की इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। सतपुड़ा के जंगलों की कटाई व मिट्टी के कटाव चलते अब यहां जल रिसाव कम होता जा रहा है। नहरों के छिद्रों में कैल्शियम की मोटी परतों के कारण कई छिद्र बंद हो चुके हैं।

श्री पारेख का कहना है कि उपेक्षा का शिकार विश्व की इस अद्वितीय संरचना का संरक्षण जरूरी है। यदि समय रहते इसे संरक्षित नहीं किया गया, तो इसमें जलप्रवाह हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

1985 में 120 फीट पर पानी

रिसर्च बुक में पीएचई विभाग की जलस्तर सर्वे रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है। पीएचई के अनुसार कुंडी भंडारा क्षेत्र में वर्ष 1985 में वॉटर टेबल (जल स्तर) 120 फीट था। 120 फीट की गहराई में उक्त क्षेत्र में खुदाई पर पानी निकल आता था। वहीं वर्ष 2010 में जल स्तर 360 फीट पर पहुंच गया।

प्रतिवर्ष इसमें 20 से 40 फीट की गिरावट दर्ज की गई है जो खतरे की ओर संकेत करती है। अभी वॉटर टेबल 340 बना हुआ है। यदि समय रहते संरक्षण व रिचार्जिंग का कार्य नहीं किया गया, तो यह लेवल 500 से 600 फीट नीचे पहुंच जाएगा जो कुंडी भंडारे की सेहत के लिए ठीक नहीं होगा।

संरक्षण के उपाय सुझाए

-सतपुड़ा के पहाड़ों पर वनों की कटाई रोकी जाए।

-पहाड़ी पर बड़ी मात्रा में पौधारोपण किया जाए।

-पहाड़ों से बहते बारिश के पानी व मिट्टी को रोका जाए।

-पहाड़ी क्षेत्र में वॉटर रिचार्जिंग के प्रयास किए जाएं।

1615 में बना कुंडी भंडारा

इतिहासकार व पुरातत्वविद् होशांग हवालदार एवं डॉ. मेजर एमके गुप्ता के अनुसार 1615 में मुगल बादशाह के सूबेदार व भू-गर्भ शास्त्री अब्दुल रहीम खानखाना ने इस जलसंरचना का निर्माण कराया था। उस समय जल संकट से निपटने एवं सैनिकों को मीठे जल की पूर्ति के लिए यह जल संरचना ईरान की तर्ज पर बनाई गई थी। निर्माण के वक्त वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से सलाह-मशविरा कर पानी की खोज की गई थी।

आज भी हो रहा उपयोग

उपनगर लालबाग क्षेत्र में कुंडी भंडारे का पानी आज भी नागरिकों को मिल रहा है। नगर निगम मोटर पंप से इसका जलप्रदाय कर रही है। इसके अलावा कुंडियों से रस्सी-बाल्टी से भी लोग पानी निकालते हैं। पानी पूरी तरह से शुद्ध है।

सही नाम कुंडी भंडारा

इतिहासकारों के मुताबिक जल संरचना का नाम कुंडी भंडारा ही है। कुंडी भंडारा यानी जल का भंडारा है जो 108 कुंडियों से गुजरता है। बीते वर्षों में कुछ घटनाओं के कारण भ्रांतियों के चलते लोग इसे खूनी भंडारा कहने लगे थे, जो सही नहीं है। खूनी भंडारा अपभ्रंश है।

-कुंडी भंडारे के संरक्षण को लेकर हाल ही में राज्य पुरातत्व विभाग एवं विश्व धरोहर फंड के बीच एक करार हुआ है। इसके तहत इसके संरक्षण के लिए पहले कुंडी भंडारे में समुचित सफाई कराएंगे और बाद में उसकी मरम्मत उसी मटीरियल से करेंगे जो निर्माण में उपयोग की गई है। इसे दुस्र्स्त कर संरक्षित किया जाएगा।* जेपी आयरीन सिंथिया, कलेक्टर, बुरहानपुर

-कुंडी भंडारा विश्व स्तर की ऐतिहासिक धरोहर है। इसके संरक्षण की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। टूरिज्म विभाग के डेढ़ करोड़ व पुरातत्व विभाग के डेढ़ करोड़ स्र्पए की राशि के प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं। इस राशि से कुंडी भंडारे के संरक्षण व सौंदर्यीकरण के कार्य कराए जाएंगे।* अर्चना चिटनीस, विधायक, बुरहानपुर