भोपाल (दीपक विश्वकर्मा)। राजस्थान सरकार ने वैट घटाकर जनता को राहत देने की कोशिश की है लेकिन मप्र में दिनों-दिन पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। केंद्र सरकार जिस तरह प्रति लीटर पर निर्धारित एक्साइज ड्यूटी लगाती है उसी तरह राज्य सरकार वैट लगाए तो जनता को दोहरी मार से बचाया जा सकता है।

केंद्र सरकार पेट्रोल पर 15.33 रुपए और डीजल पर 19.51 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। वहीं मध्यप्रदेश सरकार पेट्रोल-डीजल पर 28 प्रतिशत वैट और पेट्रोल पर डेढ़ रुपए व डीजल पर 4 रुपए सेस वसूलती है। यदि डीजल और पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी होती है तो इस पर भी प्रदेश में वैट और सेस लगता है। जिसके चलते पेट्रोल और भी ज्यादा महंगा हो जाता है। अगर प्रदेश सरकार वैट को रुपए प्रति लीटर में बदलकर लागू कर दे तो इससे जनता को राहत मिल सकती है।

नवदुनिया ने जब अर्थशास्त्रियों से इस संबंध में बातचीत की तो उन्होंने इस फार्मूले को सही ठहराते हुए कहा कि इससे प्रदेश सरकार को घाटा भी नहीं होगा और राजस्व हमेशा एक जैसा प्राप्त होगा।

बजट हो जाएगा एक जैसा, केंद्र में जितनी होगी बढ़ोतरी सिर्फ उतने रुपए ही बढ़ेंगे

पेट्रोल और डीजल से प्रदेश सरकार को एक साल में करीब 12 हजार करोड़ रुपए की आय होती है। वहीं 16 हजार किलोलीटर की कुल खपत होती है। इसमें 6 हजार किलोलीटर पेट्रोल और 10 हजार किलोलीटर डीजल शामिल है। खास बात तो यह है कि रुपए प्रति लीटर के हिसाब से वैट वसूलने पर शासन को एक जैसा बजट प्राप्त होगा। वहीं, केंद्र सरकार जितने पैसों की बढ़ोत्तरी करती है उतने ही पैसे राज्य में बढ़ेंगे।

ऐसे समझें गणित

राजधानी में पेट्रोल 86.55 रुपए और डीजल 76.80 रुपए चल रहा है। अगर केंद्र सरकार इसमें 100 पैसे की बढ़ोतरी करती है तो मध्यप्रदेश सरकार इसमें 28 प्रतिशत वैट वसूलेगी। इस पर मध्यप्रदेश में बढ़ोतरी 128 पैसे हो गई। अगर, रुपए प्रति लीटर के हिसाब से वैट वसूला जाए तो महज 100 पैसे ही अतिरिक्त देने होंगे। इससे रेट एक जैसे पूरे मध्यप्रदेश में हो जाएगा।

जनता को तत्काल में सरकार ऐसे दे सकती हैं फायदा

केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करें या राज्यों को टैक्स घटाने को कहा जाए। नीति आयोग ने भी कहा है कि राज्य 15 फीसदी तक वैट कम करें। वहीं, विपक्ष केंद्र सरकार से मांग कर रहा है कि वह एक्साइज ड्यूटी घटाए। तेल कंपनियों को सरकार कुछ दिन घाटा उठाने के लिए कहे फिर बाद में उसकी भरपाई करे।

न्यूट्रल मैथड के जरिए ऐसे घटा सकते हैं दाम

सरकार रेवेन्यू न्यूट्रल मैथड अपनाकर भी जनता को राहत दे सकती है। पेट्रोल की तुलना में डीजल की खपत 3.5 गुना ज्यादा है। ऐसे में सरकार डीजल पर एक रुपए टैक्स बढ़ाकर पेट्रोल पर 3.5 रुपए घटा सकती है।

जीएसटी के दायरे में आया तो घट सकते हैं 25 रुपए तक दाम

यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो यह करीब 25 रुपए सस्ते हो जाएंगे।

करना चाहिए टैक्स कम

वैट कम होने से पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाएंगे। इससे आम जनता को काफी राहत मिलेगी। शासन को टैक्स कम करना चाहिए - गणेश सिंह बघेल, अध्यक्ष भोपाल नगर वाहन सेवा ऑनर्स समिति

दामों पर लगाया जाना चाहिए अंकुश

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम चिंता का विषय है। लगातार बढ़ रहे दामों पर अंकुश लगना चाहिए। शासन स्तर पर अन्य राज्यों की तरह टैक्स कम करना होगा, तभी महंगाई कम होगी - जितेंद्र पाल सिंह गिल, अध्यक्ष भोपाल ट्रांसपोटर्स ऑनर्स व जनकल्याण एसोसिएशन

एक जैसा हो जाएगा वैट

अगर वैट प्रतिशत से हटाकर एक फिक्स रुपए में वसूला जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है। फिलहाल 28 प्रतिशत टैक्स लिया जाता है प्रति लीटर के हिसाब से इसका रुपए में कैल्कुलेशन कर फिक्स 28 रुपए किया जा सकता। बशर्तें सरकार की मंशा जनता को राहत देने की हो - प्रदीप करंबलेकर, अर्थशास्त्री, भोपाल