उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। जन्म से अपने माता-पिता के नाम और साथ के लिए तरसी प्रिया एवं शीतल की आखिरकार भगवान से सुन ही ली। बुधवार को दोनों को माता-पिता का नाम मिला और उनका साथ भी। दरअसल 14 वर्षीय प्रिया और शीतल वो दो बेटियां हैं, जिन्हें बचपन से अपने माता-पिता का नाम और साथ नहीं मिला। दोनों ने बचपन अनाथों की तरह पहले शिवपुरी के बालिका आश्रम में गुजरा और फिर नवंबर-2016 के बाद उज्जैन के लालपुर स्थित बालिका गृह आश्रम में। दोनों ही आश्रम अधीक्षक मीना मूंगे के संरक्षण में होशियार बनीं।

प्रिया ने चित्रकला, योग एवं कराते में अपनी प्रतिभा बढ़ाई तो शीतल ने तबला वादन में। बुध्ावार को गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के अमलकांत भट्टाचार्य और उनकी पत्नी मंजू ने प्रिया को गोद ले लिया। वे वैधानिक कार्रवाई कर उसे अपने साथ गाजियाबाद भी ले गए। इसी प्रकार उप्र के ही मुगलसराय के कन्हैयालाल श्रीवास्तव और उनकी पत्नी माधुरी ने शीतल को गोद लिया। नेह के नातों में बंधे इस नए रिश्ते से बेटियां जितनी खुश थीं, उतने ही उनके माता-पिता भी।

शीतल को श्रीवास्तव दंपति गुस्र्वार को मुगलसराय ले जाएंगे। बताया कि श्रीवास्तव दंपति शुरुआत से ही नि:संतान थे। भट्टाचार्य दंपति का एक जवान बेटा था, मगर कुछ महीने पहले उसकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद दोनों पति-पत्नी तन्हा फिल करते थे। इस तन्हाई को दूर करने के लिए उन्होंने बेटी गोद लेने का निर्णय लिया और प्रिया को अपनाया। वर्तमान में प्रिया आठवीं और शीतल दसवीं की छात्रा है।