रायपुर। 8848 मीटर की ऊंचाई पर माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है। 2016 में महज कुछ ऊंचाई (648 मीटर) फतह न कर पाने का मलाल राहुल गुप्ता को था। 2018 में फिर एक बार हिमालय फतह (हिलेरी पाइंट) करने को बस 200 मीटर का फासला बाकी था।

मौसम खराब हुआ और वापस लौटने की चेतावनी मिली। जान को भी खतरा था। इसके बाद भी कदम नहीं रुके और माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराया। अंबिकापुर के रहने वाले 24 वर्षीय राहुल गुप्ता छत्तीसगढ़ के पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह की है।

वहीं 2018 में पहले शख्स के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने का गौरव भी राहुल ने अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्हें माउंटेन मैन की उपाधि दी है। नईदुनिया ने राहुल गुप्ता के संघर्ष, साहस, जज्बे और कुछ कर गुजरने की चाहत को लेकर खास बातचीत की।

राहुल गुप्ता से बातचीत

सवालः क्या माउंटेनिंग आपका सपना था?

जवाबः घर वाले चाहते थे आइएएस बनूं। 12वीं के बाद दिल्ली गया। जियोग्राफी विषय में स्नातक के लिए दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन लिया। खेल के प्रति रुझान था इस वजह से सेंट स्टीफन कॉलेज का हाइकिंग क्बल जॉइन करना चाहा, लेकिन किरोड़ीमल कॉलेज का विद्यार्थी होने की वजह से दाखिला नहीं मिला। कुछ अलग करने की चाहत थी, जिसके बाद माउंटेनिंग कोर्स करने की ठानी और वहीं से शुरू हुआ एवरेस्ट फतह करने का सफर। पांच साल के इंतजार के बाद सपना पूरा हुआ।

सवालः इससे पहले आपने कितनी बार प्रयास किया?

जवाब- 2015 में पहली बार गया। लेकिन प्राकृतिक आपदा की वजह से सभी को वापस बुला लिया गया। दूसरी बार 2016 में 8 हजार 200 मीटर की चढ़ाई चाइना (नार्थ साइड) की ओर चढ़ने बाद तबियत खराब हुई जिसकी वजह से वापस आना पड़ा। 2018 में नेपाल (साउथ साइड) से चढ़ाई की 22 दिन में फतह कर लौटे।

सवालः किस तरह की समस्याओं का समना करना पड़ा है?

जवाबः शुरुआत से लेकर अंत तक मौत के मुंह थे। हर पल खतरा बना रहा। कई बार कैंप से नीचे उतरा पड़ा। पांच कैंप बनाए जाते हैं। सबसे आखिरी कैंप चार के बाद तापमान -35 से -40 डिग्री सेल्सियस रहता है। हवाएं 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। ऑक्सीजन की कमी रहती है।

सवालः चढ़ाई के दौरान क्या ऐसा समय आया कि वापस होना पड़ सकता था?

जवाबः माउंट एवरेस्ट चोटी फतह करने में 200 मीटर और था। मौसम खराब हुआ विभाग से चेतावनी जारी हुई पूरी टीम को लौटने की। मैं टीम का लीडर था। मेरे साथ 15 लोग थे। इतना पास आकर अगर वापस लौट जाते तो फिर कब मौका मिलेगा कि नहींं यह सोच कर अन्य लोगों से कहा कि जो लौटना चाहते हैं, वो जा सकते हैं। लेकिन कोई नहीं लौटा सभी ने फतह करने की जिद की। वही ऐसा समय आया जब मनोबल टूटने लगा था।

सवालः आप की तबीयत खराब हो गई थी?

जवाबः जी हां, बर्फीली हवाओं की वजह से स्नो ब्लाइंडनेस (अंधापन आना) और फ्रॉस्ट बाइट (गालों का गलना) होने लगा था। इसकी वजह से दिखाई देना बंद हो गया। रेसक्यू टीम ने तत्काल मदद की और बेस कैंप तक पहुंचाया। अगर ज्यादा समय तक वहां रहता तो चेहरा गलने लगता और जिंदगीभर के लिए आंखों की रोशनी चली जाती।

सवालः माउंट फतह करने के बाद सबसे पहले जानकारी किसे दी? घर वालो को कब बताया?

जवाबः 11 मई रात एक बजे बेस कैंप से चढ़ाई शुरू की। 14 मई सुबह 7.20 बजे माउंट एवरेस्ट में तिरंगा फहराने के बाद। 8.10 बजे बेस कैंप में सेटेलाइट के जरिए एवरेस्ट फतह करने की सूचना दी गई। इसके बाद छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री निवास में मैसेज कर जानकारी दी गई कि माउंट एवरेस्ट फतह कर लौट रहे हैं। 16 मई शाम चार बजे बेस कैंप में पहुंच गए। इसके बाद हॉस्पिटल में पूरी तरह स्वस्थ्य होने के बाद 20 मई को पापा को फोन कर जानकारी दी।

सवालः छत्तीसगढ़ के लिए इस क्षेत्र में आप क्या करेंगे?

जवाबः यहां के युवाओं के लिए दो से तीन महीने के अंदर रायपुर में ट्रेनिंग के लिए इंस्ट्यूट खोला जाएगा। सरकार ने पूरी मदद करने का आश्वासन दिया है। मुझे छत्तीसगढ़ से पहले माउंटेनमैन की उपाधि भी दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने माउंट एवरेस्ट फतह करने का खर्च उठाया है।

जरूरी बातें आप के काम कीः

- नेपाल की एवरेस्ट की चढ़ाई एवरेज 45 से 55 डिग्री है।

- चाइना की ओर से एवरेज 55 से 60 डिग्री।

- पर्वतरोही को कोर्स दो महीने का। एक महीने बेसिक माउंटेनिंग कोर्स और इसके बाद एडवांस माउंटेनिंग कोर्स।

- दोनों कोर्स को करने में तकरीबन 15 हजार रुपए खर्च आता है। कोर्स में इंडियन आर्मी द्वारा ट्रेनिंग दी जाती है।

- प्रति व्यक्ति के हिसाब से 30 से 70 लाख रुपयों का खर्च आता है। जिसमें ट्रेनिंग से लेकर ऑक्सिजन सिलेंडर और किराए की हवाई जहाज सहित अन्य जरूरी चीजें।

- पहले दिन और आखिरी दिन पर्वतारोही रात में चढ़ाई करते हैं। बाकी दिन में करते हैं। रात में मौसम में स्थिरता रहती है।

- पर्वतारोही का कोर्स पांच जगह होता है। जम्मू-कश्मीर, उतराखंड, हिमाचल, दार्जीलिंग और अरुणांलच।

माउंट एवरेस्ट कुछ तथ्य

- माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है।

- इस चोटी पर सबसे पहले 1953 में न्यूजीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाल के शेरपा तेनजिंग नारवे ने फतह की।

- एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए वैसे तो सबसे पापुलर तीन रास्ते हैं एक नेपाल की ओर से, दूसरा तिब्बत वाला और तीसरा चीन के रास्ते। इसके अलावा अलग-अलग 18 और रास्ते हैं।

- नेपाल में माउंट एवरेस्ट को सगरमथा के नाम से जाना जाता है।