भोपाल। पिछले कुछ महीनों में मध्यप्रदेश में दुष्कर्म के कई ऐसे मामले सामने आए जिन्होंने राज्य ही नहीं बल्कि देश को हिलाकर रख दिया। इनमें मंदसौर और सतना के दुष्कर्म कांड शामिल हैं। नईदुनिया की इस स्पेशल रिपोर्ट में जानिए दुष्कर्म के इन हालिया मामलों के बारे में और किस तरह मध्यप्रदेश को 'दुष्कर्म प्रदेश' बताए जाने पर हो रही है सियासत -

26 जून को मंदसौर में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली मासूम को एक आरोपी मिठाई का लालच देकर स्कूल से ले गया और बाद में उसने साथियों के साथ मिलकर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची अगली सुबह बदहवास हालत में मिली जिसके बाद से उसका इलाज इंदौर में जारी है।

1 जुलाई को सतना में पिता के साथ सो रही 4 साल की मासूम को हैवान उठाकर ले गए और दुष्कर्म कर अधमरी हालत में छोड़ दिया। इस बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती करवाया गया है।

21 जून को मौसी की शादी में शामिल होने आई 6 साल की मासूम बच्ची को आइस्क्रीम का लालच देकर एक युवक ले गया और उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में सुनवाई जारी है।

पिछले कुछ महीनों में सागर में ही दो से तीन दुष्कर्म के मामले आए। इनमें एक मामला 10 मई का है जिसमें आरोपी ने युवती के साथ दुष्कर्म कर उसे जिंदा जला दिया। वहीं 21 मई को रहली थाना इलाके में एक 9 साल की बच्ची को अगवा कर दुराचार का मामला सामने आया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां 47 दिनों में सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने दोषी भागीरथ को फांसी की सजा सुनाई है।

प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर को भी ऐसी घटनाओं के कारण शर्मसार होना पड़ा है। शहर के जूनी इंदौर इलाके में एयरहोस्टेस की ट्रेनिंग ले रही छात्रा से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। घटना 6 जुलाई की है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

शहर में जून महीने में चचेरे भाई द्वारा दुष्कर्म के दो अलग मामले सामने आए। एक मामले में आरोपी ने देवास की रहने वाली छात्रा से दुष्कर्म कर किया जिससे वो गर्भवती हो गई। उसे देर रात सड़क पर बदहवास हालत में भटकते देखा गया और अस्पताल पहुंचाया।

यह एक या दो मामले नहीं है जब राज्य में किसी युवती या महिला की अस्मत इस तरह तार-तार हुई हो। इसके पहले छतरपुर में एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था।

विपक्ष ने मध्यप्रदेश को बताया 'दुष्कर्म प्रदेश', उठा सियासी बवाल

मध्यप्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी मैदान में उतर चुकी कांग्रेस ने दुष्कर्ष के मामलों में सियासी हथियार बना लिया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यकाल में मध्यप्रदेश दुष्कर्म प्रदेश बन चुका है।

वहीं इसके जवाब में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने कहा कि कमलनाथ ने मध्यप्रदेश को दुष्कर्म प्रदेश बताकर प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता का अपमान किया है। इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए, उन्हें तत्काल पद से हटा देना चाहिए। झा ने कहा कि ज्यादती की घटनाएं होना बेहद दुखद है। प्रदेश सरकार ने ऐसे आरोपियों को फांसी की सजा का प्रावधना भी किया है।

कानून हुआ सख्त, लेकिन नहीं दिखा असर

हालांकि, पिछले साल भोपाल में हुए सामुहिक दुष्कर्म कांड के बाद राज्य सरकार ने एक ऐसा विधेयक पास किया है जो नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाली इस तरह की हैवानीयत को अंजाम देने वालों को मौत की सजा देने का काम करता है। इस बीच कुछ दोषियों को फांसी की सजा भी हुई है।

भले ही राज्य सरकार ने इतना बड़ा कानून बना लिया हो लेकिन ऐसा लगता नहीं की अपराधियों में कानून का कोई डर है। बिल पास होने के बाद लगातार सामने आ रही दुष्कर्म की इन घटनाओं ने प्रदेश को शर्मसार कर दिया है।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 10 सालों से मध्य प्रदेश अपने सीमा से लगते अन्य राज्यों की तुलना में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में सर्वोच्च स्तर पर रहा है। पिछले साल जारी हुए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे देश में दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश में सामने आए हैं। 10 साल से मध्यप्रदेश अपनी सीमा से लगते अन्य राज्यों की तुलना में दुष्कर्म के मामले में सबसे ऊपर है। (नीचे चार्ट देखें)

दर्ज मामलों में सबसे अहम बात यह है कि ज्यादातर केस में पीड़िताओं के साथ दुष्कर्म करने वाले कोई अनजान नहीं, बल्कि उनके अपने रिश्तेदार या परिचित थे।

2015 में मध्यप्रदेश में दुष्कर्म के 4391 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें 94.8 प्रतिशत यानी 4161 आरोपी पीड़िताओं के रिश्तेदार निकले। वहीं महाराष्ट्र के 4144 मामलों में से 99.3 प्रतिशत पहचान वाले, पड़ोसी या रिश्तेदार थे।

राजस्थान में भी 99.4 प्रतिशत (3644 में से 3622) आरोपी ऐसे ही रहे। इसी तरह उत्तरप्रदेश के 3025 मामलों से 2963, छत्तीसगढ़ के 1550 में से 1510 और गुजरात के 503 में से 500 आरोपी परिचित थे।

महिलाओं के खिलाफ इस क्राइम रेट में छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं

- 10 साल से मध्यप्रदेश महिलाओं के खिलाफ होने वाले इस घिनौने अपराध (दुष्कर्म) के मामले में शीर्ष पर है। राज्य की प्रति 10 हजार की आबादी के हिसाब से औसत क्राइम रेट 0.44 है, जो 2016 में 0.66 तक पहुंच गई है।

- छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसा ही ट्रेंड है। 2007 में 0.41 की क्राइम रेट की तुलना में 2016 में यह आंकड़ा 0.61 रहा।

- बीते 10 साल में यूपी में क्राइम की यह दर 0.25 से घटकर 0.22 हो गई है। गुजरात में क्राइम रेट 0.13 से 0.15 के बीच बनी हुई है।

- महाराष्ट्र में क्राइम रेट 2007 में जहां 0.13 पर थी, वहीं 2016 में यह लगभग तीन गुना होकर 0.35 पर पहुंच गई। ऐसे ही राजस्थान में भी 0.19 से लगभग दोगुना से ज्यादा होकर 2016 में 0.49 हो गई।

गुजरात बेहतर, यूपी सुधरा

साल 2016 में दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले (4828) मध्यप्रदेश में दर्ज हुए हैं। 4816 मामलों के साथ यूपी इस सूची में दूसरे नंबर है, वहीं 4189 मामलों के साथ महाराष्ट्र तीसरे पायदान पर है। राजस्थान में भी दुष्कर्म के 3656 मामले दर्ज हुए हैं। छत्तीसगढ़ में 1626, जबकि गुजरात में 982 केस दर्ज हुए हैं।

रेप के मामलों में 2015 में भी मध्यप्रदेश टॉप पर था। तब मध्यप्रदेश में 4391, तो महाराष्ट्र में 4144 केस रिकॉर्ड हुए थे। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में क्रमशः 3644 और 3025 केस दर्ज हुए थे।

2016 में बढ़े मामले

- महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में कुल 3,38,954 मामले दर्ज हुए हैं।

- इनमें 38,947 मामले तो सिर्फ दुष्कर्म के हैं, जबकि यौन शोषण और यौन हमलों के 84,746 हजार मामले अलग हैं।