विनय वर्मा बैतूल, नवदुनिया। बैतूल जिले का खंडारा गांव, यहां हर घर पर न केवल नामपट्टिकाएं लगी हैं बल्कि इन पर घर की बेटियों का नाम शोभायमान है। इस गांव से शुरू हुई यह मुहिम अब जिले के हर गांव और शहर में फैल चुकी है। जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर खंडारा गांव से शुरू हुआ यह अभियान अब अन्य गांवों से होता हुआ शहर तक आ पहुंचा है।

बड़ी संख्या में लोग अपनी बेटियों के नाम पर नेम प्लेट लगा रहे हैं। बैतूल शहर के भगतसिंह वार्ड में रहने वाले अखिलेश ठाकुर के मकान में अब उनकी बेटी लहक व लक्ष्मी की नेम प्लेट (नामपट्टिका) लगी हुई है, वहीं पटेल वार्ड निवासी राजेश चौकीकर ने भी अपने नाम की नेम प्लेट हटाकर अपनी बेटियों वैष्णवी एवं समीक्षा की नेम प्लेट घर लगा दी है।

दरअसल ऐसा उन्होंने बेटियों को सम्मान और पहचान देने के एक अभियान के तहत किया है। खंडारा गांव से स्वयंसेवी अनिल यादव ने इस मुहिम की शुरुआत की थी। उन्होंने 'डिजिटल इंडिया विद लाडो" अभियान के तहत लोगों को उनकी बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया। कुछ लोगों को बेटियों के नाम की नेम प्लेट बना कर भी दी। खंडारा गांव में इस समय 200 घरों में से 155 घरों में बेटियां हैं। इन सभी घरों में बेटियों के नाम की प्लेट लगाई जा चुकी है।

इन घरों की पहचान अब घर के मुखिया के नाम से नहीं बल्कि बेटियों के नाम से होती है। इस पहल से गांव में एक बड़ा बदलाव यह हुआ कि अब बेटियों को केवल अपने परिवार में ही नहीं बल्कि पूरे गांव में एक जैसा मान-सम्मान मिलता है। यही नहीं इस अभियान से प्रभावित होकर विधायक ने एक सरकारी भवन का नाम भी किसी प्रतिभाशाली बेटी के नाम पर रखने की घोषणा की। अनिल यादव बताते हैं कि उनके घर जब बेटी ने जन्म लिया तो बेहद खुशी हुई और तभी लगा कि बेटी के सम्मान के लिए कुछ करना चाहिए। उसी के बाद से वे स्वयं के खर्च पर बेटियों को नेम प्लेट का तोहफा देते आ रहे हैं। इससे खंडारा गांव की तो पहचान ही अब बेटियों के नाम से हो गई है।