प्रेमविजय पाटिल, धार। श्रीलंका में हिंदी फिल्में और उनके गानों के साथ-साथ अब टीवी धारावाहिकों के प्रति भी विशेष जुनून है, इसीलिए वहां के लोग हिंदी के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। धार जिले की शिक्षिका शिरीन कु रैशी 4 साल और 2 माह कोलंबो में हिंदी शिक्षक के तौर पर काम कर चुकी हैं। वहां करीब 5000 तमिलों को उन्होंने हिंदी सिखाई।

शिरीन ने बताया कि श्रीलंका जाने के पूर्व उन्हें निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा देने के बाद मुझे हिंदी शिक्षक के तौर पर प्रतिनियुक्ति पर विदेश मंत्रालय के अधीन भारतीय संस्कृति परिषद के माध्यम से श्रीलंका में हिंदी की सेवा का मौका मिला। मुझे इस बात को लेकर विशेष लगाव था कि दूसरे मुल्क के लोग भी मेरी मातृभाषा को जानें। श्रीलंका में हिंदी सीखने के प्रति लोगों में जबर्दस्त उत्साह है।

श्रीलंका में आज भी आकाशवाणी के विविध भारती के कार्यक्रम सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। रेडियो सीलोन और विविध भारती की वजह से भी वहां के लोगों में हिंदी सीखने के प्रति शौक जागा है। 4 साल में मैंने कोलंबो में करीब 5000 तमिल भाषियों को हिंदी सिखाई। वे अब हिंदी में दक्ष हो गए हैं। उनकी इच्छा शक्ति से हमें भी लगातार हिंदी की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है।

श्रीलंका में भारतीय फिल्मों के गानों और टीवी सीरियल पसंद किए जाते हैं। वहां की बुजुर्ग और युवा पीढ़ी हिंदी गानों को सुनती और गुनगुनाती है। हिंदी सीखने वालों की संख्या पर्यटन की वजह से भी तेजी से बढ़ी है। श्रीलंका में सीताजी का मंदिर है और रामायण से संबंधित भी कुछ स्थान बताए जाते हैं। ऐसे में भारतीय बड़ी संख्या में वहां पहुंचते हैं। श्रीलंका में बतौर गाइड काम करने वाले युवा भी हिंदी सीखने को लेकर जागरूक हैं।

दो महत्वपूर्ण संस्थानों में हिंदी की शुरूआत की

उन्होंने बताया कि कोलंबो के भंडारनायके स्टडी सेंटर में दुनियाभर की भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, लेकि न हिंदी की वहां नहीं पढ़ाई जा रही थी। इसी प्रकार यूनिवर्सिटी में भी हिंदी विषय नहीं था। ऐसे में मैंने दोनों महत्वपूर्ण संस्थानों में हिंदी सिखाने की शुरूआत करवाई।

कोलंबो में संस्कृति परिषद के तहत होली, नवरात्रि, दीपावली के आयोजन करवाने की परंपरा भी शुरू करवाई है। मुझे हिंदी में पुस्तक लिखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रीलंका के लोगों के लिए मैंने बहुत ही सरल भाषा में हिंदी सीखने और हिंदी को अपनाने के लिए लेखन भी कि या। आने वाले समय में जब भी गैर हिंदी भाषी क्षेत्र में हिंदी का मान बढ़ाने का मौका मिलेगा तो मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूंगी। शिक्षिका कुरैशी वर्तमान में सरदापुर के शासकीय स्कू ल में पदस्थ हैं।