भोपाल। अब सरकारी स्कूल के पहली से पांचवीं तक के बच्चों को नैतिक शिक्षा को पाठ के रूप में नहीं, बल्कि एक पूरी किताब पढ़ाई जाएगी। इसके लिए अलग से किताब तैयार की जा रही है। इस संबंध में पाठ्य पुस्तक स्थायी समिति व राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) पांच बिंदुओं पर पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी एससीईआरटी की होगी।

अभी तक हिंदी में एक चैप्टर के रूप में बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता रहा है। यह किताब अगले सत्र से स्कूलों में लागू कर दी जाएगी। नैतिक शिक्षा की किताब को अलग से जोड़ा जरूर जा रहा है, लेकिन इसका बोझ बच्चों पर एक विषय के रूप में नहीं होगा। इसकी अलग से परीक्षा नहीं होगी, बल्कि हिंदी के साथ ही बोनस अंक बच्चों को दिए जाएंगे।

पांच बिंदुओं पर तैयार हो रही किताब

नैतिक शिक्षा की किताब को पांच बिंदुओं पर तैयार किया जा रहा है। इसमें ईमानदारी, शिष्टाचार, शारीरिक स्वच्छता, सदाचार, अनुशासन शामिल है। इसे कक्षा के हिसाब से कहानी, कविता के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इसे हिंदी की कक्षा के साथ सप्ताह में एक या दो दिन पढ़ाया जाएगा। इस विषय को हिंदी के शिक्षक ही पढ़ाएंगे।

शिक्षकों को दी जाएगी ट्रेनिंग

हिंदी के शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे कक्षावार पाठ पढ़ाने की सीख दी जाएगी। बच्चों को फोटो के माध्यम से अधिक समझाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बच्चे देखकर समझ सकें। साथ ही वीडियो तैयार करने पर भी विचार चल रहा है, जिसे बच्चों को प्रोजेक्ट के रूप में भी दिया जा सकता है। इसमें छोटे-छोटे लेख भी लिखने के लिए दिए जाएंगे।

बेहतर चरित्र का निर्माण होगा

- बच्चों को बचपन से ही नैतिकता की पूरी सीख मिलेगी तो आगे भी उनमें एक बेहतर चरित्र का निर्माण होगा। आज के समय में बच्चों में नैतिकता की शिक्षा बहुत जरूरी है।

डॉ. भागीरथ कुमरावत, सदस्य, पाठ्य पुस्तक स्थायी समिति