हरिचरण यादव, भोपाल। बाघ ने उनके गांव के एक आदमी का शिकार कर लिया लेकिन वो नहीं चाहते कि बाघ पर आदमखोर होने का दाग लगे और उसे इस क्षेत्र से कहीं और शिफ्ट किया जाए। यदि इस बाघ ने एक और शिकार किया तो उसे आदमखोर घोषित किया जा सकता है। ऐसा न हो इसलिए उमरिया जिले के घुनघुटी वनपरिक्षेत्र के ढाई हजार ग्रामीण फिल्म देख कर बाघों से बचने के गुर सीख रहे हैं। घुनघुटी वनपरिक्षेत्र के पनवारी, काचोधर, आमगार, मालाचुआ और बाहन्नारा गांव में इन दिनों बाघ की दहशत है।

21 जून को दो शावकों के साथ घूम रही बाघिन ने पनवारी गांव के एक चरवाहे का शिकार कर लिया था। खास बात यह है कि इन ग्रामीणों की जीविका जंगल पर निर्भर है। जिससे उनका बाघों से आमनासामना होता रहता है। घटना के बाद से ग्रामीण तनाव में हैं। जंगल और खेतों में आना-जाना बंद कर दिया था। शुरुआत में वे वन विभाग के अधिकारियों से बात करने के लिए तैयार नहीं थे। इसे देखते हुए वन विभाग के अधिकारी व वन्यप्राणी संरक्षण को लेकर काम करने वाली संस्था 'लॉस्ट विल्डरनेश फाउंडेशन" के 22 विशेषज्ञ गांवों में डेरा डाले हुए हैं।

ग्रामीणों को अब समझा लिया गया है और वे भी नहीं चाहते कि उनके क्षेत्र की पहचान बाघ कहीं और जाए। अधिकारी व विशेषज्ञ गांव-गांव में जाकर समूह में फिल्म दिखा रहे हैं। फिल्म के जरिए बताया जा रहा है कि जंगल व खेत में जाते समय अकेले चलने से बचे, समूह में जाएं, आवाज करते हुए व गाना गुनगुनाते हुए जाएं। बाघ दिखने पर एकदम से दौड़ न लगाएं, धीरे-धीरे पीछे हटें। खुद की सुरक्षा के लिए हाथों में डंडा व लकड़ी लेकर चलें। गांवों में पोस्टर लगाकर भी जागरूकता लाई जा रही है।

फिल्म देखने तैयार नहीं थी महिलाएं

बारिश के बाद खेतों में निंदाई-गुड़ाई का समय रहता है, इसलिए ग्रामीण महिलाएं फिल्म देखने व जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर रही थी। उन्हें बताया कि ग्रामीणों की मदद नहीं मिली और घटना हुई तो बाघों को हमेशा के लिए कैद में (किसी चिड़ियाघर) में रखना पड़ सकता हैं। इसके बाद महिलाएं मानी और फिल्म देखने के लिए राजी हुई। - राहुल मिश्रा, एसडीओ, पाली सब डिविजन, उमरिया

जागरूकता जरूरी

जागरूकता के बिना बाघ हो या दूसरे वन्यप्राणी, सभी की सुरक्षा खतरे में है। बाघों को बचाने के साथ-साथ जंगल को बचाने की जरूरत है। - डॉ. फैयाज खुदसर, वन्य प्राणी विशेषज्ञ