विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव, खरगोन। कुम्हारखेड़ा के रहवासियों ने मिसाल कायम कर दी। जनप्रतिनिधियों से लगातार आग्रह और उनके मुंह फेर लेने के बाद ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को भी ठेंगा बता दिया। मात्र तीन दिन में लगभग डेढ़ किमी सड़क की मरम्मत कर डाली। अब इस सड़क पर स्कूल जाने वाले बच्चांे को सबसे अधिक आसानी होगी।

उल्लेखनीय है कि कुम्हारखेड़ा-कुकडोल मार्ग के लिए ग्रामीणों ने आंदोलन तक किए, लेकिन नतीजा सिफर रहा। कीचड़ से सने इस मार्ग पर चलना दूभर था। इस काम के लिए ग्रामीण एकजुट हुए।

ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश में सड़क पर कीचड़ होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे। लगातार आग्रह के बावजूद जनप्रतिनिधियों ने निराश किया। बच्चों की पढ़ाई के महत्व को देखते हुए यह कार्य किया। सड़क बनाने की मांग को लेकर गत वर्ष छात्राओं ने कलेक्टोरेट में रैली निकालकर प्रदर्शन भी किया था।

80 हजार आया खर्च

ग्रामीणों ने पिछले दिनों बैठक आयोजित की। ग्रामीण राजेश चौहान व वीरेंद्रसिंह चौहान ने बताया कि गांव के ही लोगों ने सहयोग किया और अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली दे दिए। चौहान के अनुसार गांव के 20 ट्रैक्टरों की मदद से करीब 150 ट्रॉली मुरम डाली गई। प्रत्येक ट्रॉली का लगभग 500 रुपए खर्च आया।

अनुमान के मुताबिक अभी तक 80 हजार रुपए का खर्च हो चुका है। ट्रैक्टर-ट्रॉली के अलावा ग्रामीणों ने श्रमदान भी किया। इसमें जगदीश सिंह चौहान, राधेश्याम आदि ग्रामीणों ने सहयोग दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने उन्हें निराश किया। मौका आने पर अधिकारों का उपयोग करते हुए चुनाव का बहिष्कार भी करेंगे।

100 से अधिक विद्यार्थियों की आवाजाही

ग्राम कुकडोल से कुम्हारखेड़ा और कुकडोल से भसनेर की दूरी करीब 2 किमी है। कुम्हारखेड़ा व भसनेर से प्रतिदिन 100 से अधिक विद्यार्थी कुकडोल स्थित शासकीय हाईस्कूल में पढ़ने जाते हैं। इसके अलावा ग्रामीणों की भी आवाजाही होती है। कुम्हारखेड़ा व कुकडोल की करीब 5 हजार आबादी है। अब ग्रामीणों को आवागमन में आसानी होगी।

सड़क निर्माण में फंसा तकनीकी पेंच

ग्राम पंचायत कुम्हारखेड़ा ने सड़क निर्माण के लिए प्रयास किए, परंतु तकनीकी पेंच फंस गया। रोजगार सहायक ब्रह्मानंद सेन ने बताया कि इस पंचायत के साथ कुकडोल पंचायत का संयुक्त प्रकरण है। स्वीकृति के लिए 14-14 लाख के दो प्रस्ताव मनरेगा योजना अंतर्गत भेजे गए हैं। जनपद पंचायत के अनुसार भोपाल स्तर से मनरेगा में रोड निर्माण की स्वीकृति फिलहाल नहीं मिल रही है। सरपंच रमेश का कहना है कि ग्रामीणों के साथ वे सहयोग कर रहे हैं।

सराहनीय प्रयास

ग्रामीणों की एकजुटता व प्रयास सराहनीय है। सुदूर संपर्क सड़क अंतर्गत मनरेगा में वर्तमान कार्य प्रगति पर होने के कारण संबंधित कार्य को स्वीकृति नहीं मिली है। बावजूद ग्रामीणों की मिसाल को देखते हुए इस गांव को प्रोत्साहित किया जाएगा। -सतीश कुमार, सीईओ, जिला पंचायत, खरगोन