किशोर खन्ना शुजालपुर। आवारा कुत्तों का पेट भरने के लिए अनूठा रोटी बैंक चल रहा है। जीवदया ट्रस्ट पिछले 11 सालों से बिना प्रचार-प्रसार के काम में लगा हुआ है। प्रतिदिन सड़कों पर घूमते अवारा कुत्तों के लिए सुबह 4 बजे से रोटियां बनने लगती हैं और 7 बजे कुत्तों को भरपेट खाना खिलाने निकलते है जीवदया के सदस्य। जीव दया व पुण्य लाभ के भाव से अंशदान देकर लोग विशेष अवसरों पर रोटी के साथ-साथ कुत्तों को लड्डू, बालूशाही व अन्य मिष्ठान भी बंटवाते हैं। इस रोटी बैंक के पास इस समय 75 हजार फिक्स डिपाजिट है और हर साल इसका ऑडिट भी होता है।

शुजालपुर में 16 फरवरी 2007 से कुत्तों के लिए रोटी बैंक की शुरुआत हुई। देवेंद्र कुमार जैन ने इस काम को शुरू करने का प्रस्ताव रखा था, चंद्रकांता जैन ने सबसे पहले एक किलो आटे की रोटियां अपने घर से बनाकर इस अभियान को शुरुआत की । 15 दिन तक उन्होंने अपने घर खुद रोटियां बना कर इस मुहिम को शुरू किया इसके बाद रोज सुबह 7 बजे प्रार्थना और उसके बाद शहर में जाकर कुत्तों को रोटी देने का काम शुरू हो गया। धीरे-धीरे सब व्यवस्थाएं जुड़ती गई और एक छोटी सी पहल, रोटी बैंक बन गई।

सुबह 9 बजे तक खुला रहता है रोटी बैंक -

रोटी बैंक में एक महिला कर्मचारी सुबह चार बजे से रोटियां बनाने का काम शुरू कर देती है। प्रार्थना के बाद प्रतिदिन देवेंद्र कुमार जैन, प्रमोद पी जैन, संतोष चौधरी, राजेंद्र चौधरी व बद्री प्रसाद यादव रोटी बैंक की रोटियां लेकर शहर में कुत्तों को देने के लिए निकल पड़ते हैं। सुबह 9 बजे तक रोटी बैंक खुला रहता है।

ऐसे चलता है खर्च -

इस रोटी बैंक में चार वार्षिक सदस्य व 30 मासिक सदस्य न्यूनतम 20 से लेकर अधिकतम 150 प्रतिमाह की राशि देते हैं। एक सेवक हर महीने लोगों के पास जाकर रोटी बैंक का कलेक्शन करता है। प्रतिदिन 60 से 70 कुत्तों का पेट यह रोटी बैंक भरता है। महीने 8000 व सालाना एक लाख का औसतन खर्च होता है।

4 प्रदेश के लोग सहभागी -

महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली में रहने वाले शुजालपुर से संबंधित लोग सहभागी हैं। महाराष्ट्र के रोशन कुमार गोलडा, राजस्थान के कोटा से विनोद कुमार जैन, शाजापुर, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, आगर के 38 नियमित व इतने ही विशेष अवसर पर सहयोग करने वाले दानदाता जुड़े हुए है।