उदय प्रताप सिंह, इंदौर। सिवनी निवासी प्रियांशु सनोडिया जब 10वीं में थी तो गांव में स्कूल न होने से रोज छह किलोमीटर साइकिल चलाकर पढ़ने जाती थी। सतना के कुलदीप सिंह तो 10 किलोमीटर दूर साइकिल से स्कूल पढ़ने जाते थे। ऐसे सैकड़ों बच्चे जो ग्रामीण इलाकों में अभाव व चुनौतियों के बीच अपने करियर का सपना बुन रहे थे, अब इंदौर में अपना सपना पूरा करेंगे। ये शासन की सुपर 100 योजना में चयनित छात्र हैं जो चयनित होने के बाद मल्हार आश्रम के स्कूल में न सिर्फ पढ़ाई बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करेंगे।

153 में से 134 छात्रों ने लिया प्रवेश : इस वर्ष सुपर 100 की चयन परीक्षा के बाद इंदौर के मल्हार आश्रम स्कूल में 153 छात्रों का मेरिट में चयन हुआ। इसमें से 134 छात्र आ चुके हैं। मैथ्य व बायो संकाय के अधिकांश छात्र तो आ चुके हैं लेकिन कॉमर्स संकाय में बहुत कम छात्रों ने प्रवेश लिया है। इस बार प्रवेश प्रक्रिया में ज्यादा समय लगने से एक महीने देरी से पढ़ाई शुरू हुई। अब बची हुई सीटों पर वेटिंग लिस्ट के छात्रों को मौका दिया जाएगा।

सिलाई कर पिता ने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाया

मंदसौर निवासी कृष्णकांत टेलर के पिता सिलाई कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कृष्णकांत को भी पिता के काम में मदद करना पड़ती थी। पिता ने सिलाई कर बेटे को इस मुकाम पर पहुंचाया। अब बेटा अपने पिता के सपने को पूरा करेगा। सुपर 100 में चयन होने के बाद कृष्णकांत का सपना है कि वह आईआईटी में जाए और अपने घर की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास करे।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन पिता को करेगा मजबूत

श्योपुर निवासी अभिषेक बैरागी के पिता मजदूरी करते हैं और मां सिलाई करती है। अभिषेक का कहना है कि वह सुपर 100 तक उनकी मेहनत से ही पहुंच सका है। अब इंदौर में पढ़ाई में इतनी मेहनत करेगा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन जिम्मेदारी उठा सके और पिता को मजदूरी न करना पड़े।

साइकिल खराब होने पर पैदल भी स्कूल जाना पड़ता था

खरगोन के अंकित राजोरिया का कहना है कि उसके गांव में स्कूल नहीं होने से उसे 6 किमी दूर साइकिल से पढ़ने जाना पड़ता था। साइकिल खराब होने पर पैदल भी जाता था। चयन के बाद उसे सुकून है कि अच्छे स्कूल व बेहतर शिक्षकों के सानिध्य में वह अपने सपने पूरे कर पाएगा।