रजनीश वाजपेयी, कटनी। भारत में अंग्रेजी हुकूमत के समय हिंदुस्तानियों को सूली पर लटकाने वाला क्रूर अंग्रेज अफसर उस समय राबिनहुड बन गया जब उसने ठगी प्रथा का दमन कर हजारों लोगों के जीवन की रक्षा की। मध्यप्रदेश के कटनी शहर में अंग्रेज अधिकारी कर्नल विलियम हेनरी स्लीमन को आज भी दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त समझा जाता है। इसी के नाम पर कटनी के एक कस्बे का नाम स्लीमनाबाद रखा है।

एलआईबी पुलिस बनाकर ठगों को पकड़ा

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार 1790-1840 के बीच इन गिरोह ने 931 सीरियल किलिंग की जो कि विश्व रिकॉर्ड है। इस समस्या से निजात पाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने एक विशेष पुलिस दस्ता तैयार किया जिसकी कमान कर्नल हेनरी विलियम स्लीमन को सौंपी। कर्नल स्लीमन ने अपनी एलआईबी पुलिस बनाकर इन्हें न सिर्फ पकड़ा वरन सैकड़ों ठगों को मौत के घाट भी उतार दिया।

लोगों के गायब होने का रहस्य जानने आया था स्लीमन

17वीं और 18वीं में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बुंदेलखंड से विदर्भ और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ठगों का राज चलता था। जो ठगी को अपना व्यवसाय मानते थे। जब ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी गायब होने लगे, तो कंपनी ने इसका रहस्य जानने हेनरी स्लीमन भेजा। तब स्लीमन को पता चला कि 200 सदस्यों का एक ऐसा गिरोह है, जो लूट के लिए हत्या करता था। जिसका मुखिया बेहराम नाम का ठग था। लोगों के गायब होने के पीछे इन ठगों का ही हाथ था। करीब 10 साल की मशक्कत के बाद बेहराम पकड़ा गया और तब सारी चीजों का खुलासा हुआ। कर्नल स्लीमन ने करीब 1400 ठगों को फांसी दी थी।

कौन थे कर्नल स्लीमन

कर्नल स्लीमन ने भारत में 1806 में बंगाल आर्मी ज्वाइन की थी। 1814-16 में नेपाल युद्ध में सेवाएं दीं और फिर 1820 में सिविल सेवा में आए बाद में उन्हें जबलपुर में गवर्नर लॉर्ड विलियम का सहायक बनाया। इसी दौरान उन्होंने बनारस से नागपुर तक सक्रिय ठगों और पिंडारियों के उन्मूलन के लिए स्लीमनाबाद में अपना कैंप लगाया। यहां उन्होंने मालगुजार गोविंद से 56 एकड़ जमीन लेकर स्लीमनाबाद बसाया था।

ठगों के बच्चों का पुनर्वास भी किया

ठगों के खात्मे के बाद उनके बच्चों को जीवन यापन करने अन्य व्यवसाय सिखाना आवश्यक था। जिसके लिए जबलपुर में रिफॉर्मेट्री स्कूल खोला गया था। वर्तमान में यहां पर पॉलीटेक्निक कॉलेज है। यहां ठगों के बच्चों को तरह-तरह के व्यवसाय सिखाए गए थे।

हरिदास मंदिर में मन्नत से हुई संतान की प्राप्ति

स्लीमन का विवाह 21 जून 1829 में एमली जोसेफिन से हुआ था। कई वर्षों तक कोई संतान न होने पर उनके किसी शुभचिंतक ने उन्हें यहां के एक गांव कोहका में बने हरिदास मंदिर में मन्नात मांगने की सलाह दी। कहा जाता है कि स्लीमन ने जब वहां प्रार्थना की तो एक साल बाद उन्हें संतान प्राप्ति हुई।