मल्टीमीडिया डेस्क। इस साल बैशाख पूर्णिमा शनिवार को 18 मई के दिन मनाई जाएगी। इसी दिन भगवान विष्णु के नौंवे अवतार माने जाने वाले गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था इसलिए उसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें बैसाख पूर्णिमा के दिन की बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था और इसी दिन गोरखपुर से 50 किलोमीटर दूर स्थित कुशीनगर में उनका महानिर्वाण भी हुआ था।

वैशाख पूर्णिमा पर सत्य विनायक का व्रत भी रखा जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने अपने प्रिय मित्र सुदामा को सत्य विनायक का व्रत रखने को कहा था, जिसे करने के बाद उनकी गरीबी दूर हुई थी। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस साल मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा बहुत शुभ है। दरअसल, इस दिन स्वामी देव गुरु बृहस्पति व नवग्रहों के राजा सूर्यदेव आमने-सामने रहेंगे। इस कारण सूर्य व गुरु का समसप्तक राजयोग बनेगा, जिससे इस दिन सभी कार्यों में स्थायित्व के साथ उन्नति से भरपूर रहेगा।

18 मई को समप्तक राजयोग बनने से भूमि, मकान, वाहन खरीदना, पदभार ग्रहण करना और नए व्यापार व्यवसाय का शुभारंभ करना बहुत ही अधिक शुभ फलदायी और मंगलकारी होगा। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करने से चारों तरफ से सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। ऐसे में समसप्तक राजयोग के चलते यह तिथि महत्वपूर्ण हो गई है। वैशाख पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान को लेकर मान्यता है कि इससे कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन कुछ मीठा दान करने से गौदान को दान करने के बराबर फल मिलता है।

पूर्णिमा पर ज्योतिष में करने वाले कुछ उपायों से जीवन में कई तरह की परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इस योग में दूध और शहद के उपाय से धन, मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होती है। इस पावन तिथि पर पवित्र सरोवर या नदी में स्नान, दान, ध्यान, जप, व्रत और तर्पण आदि करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त होता है। इस दिन पितरों के निमित्त किए गए कार्यों से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।