विजयादशमी भारतीय परंपरा के महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक और संदेश के रूप में मनाया जाता है। इसे दशहरा भी कहा जाता है। पारंपरिक तौर पर इसे रावण पर राम की विजय के दिन के रूप में मनाया जाता है।

बुराई किसी भी भी रूप में हो सकती हैं, जैसे क्रोध, असत्य, बैर, इर्ष्या, दुख, आलस्य आदि। किसी भी आतंरिक बुराई को खत्म करना भी एक आत्म विजय है।

आश्विन मास में नवरात्र का समापन होने के अगले दिन यानी दशमी तिथि को मनाया जाने वाला दशहरे का यह पर्व बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन खासकर खरीददारी करना शुभ माना जाता है जिसमें सोना, चांदी और वाहन की खरीदी बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह त्योहार वर्षा ऋतु की समाप्ति का सूचक है।

दशहरे के दिन भगवान श्रीराम की पूजा का दिन भी है। इस दिन घर के दरवाजों को फूलों की मालाओं से सजाया जाता है। घर में रखे शस्त्र, वाहन आदि भी पूजा की जाती है। उसके बाद बुराई के प्रतीक के तौर पर रावण दहन किया जाता है।

यह बुरे आचरण पर अच्छे आचरण की जीत की खुशी में मनाया जाने वाला त्योहार हैं, सामान्यत: दशहरा एक जीत के जश्न के रूप में मनाया जाने वाला त्योहार हैं। जश्न की मान्यता सबकी अलग-अलग होती है। जैसे किसानों के लिए नई फसलों के घर आने का जश्न है।

पुराने वक्त में इस दिन औजारों और हथियारों की पूजा की जाती थी, क्योंकि वे इसे युद्ध में मिली जीत के जश्न के तौर पर देखते थे, लेकिन इन सबके पीछे एक ही कारण होता है बुराई पर अच्छाई की जीत। किसानों के लिए यह मेहनत की जीत के रूप में आई फसलों का जश्न और सैनिकों के लिए युद्ध में दुश्मन पर जीत का जश्न है।

विजयादशमी की कथा

विजयादशमी के दिन के पीछे कई कहानियां हैं, जिनमें सबसे प्रचलित कथा है भगवान राम का युद्ध जीतना अर्थात रावण की बुराई का विनाश कर उसके घमंड को तोड़ना। वहीं इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था। इसलिए भी इसे विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है और मां दूर्गा की पूजा भी की जाती है।

माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी मां दूर्गा की पूजा कर शक्ति का आह्वान किया था, भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिए रखे गए कमल के फूलों में से एक फूल को देवी ने स्वयं गायब कर दिया। चूंकि श्री राम को राजीवनयन यानी कमल के समान नेत्रों वाला कहा जाता था इसलिए उन्होंने अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया। ज्यों ही वे अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्ना होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयी होने का वरदान दिया।

माना जाता है इसके पश्चात दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया। भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में देशभर में मनाया जाता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने के अलग अंदाज भी विकसित हुए हैं। कुल्ली का दशहरा देश भर में काफी प्रसिद्ध है तो पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इसी तरह मैसूर का दशहरा भी देश-दुनिया में बहुत प्रसिद्ध है।