गुरुवार के दिन हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है। हमारे धर्म शास्त्रों में भी गुरुवार के दिन भगवान विष्णु का व्रत एवं पूजा का उल्लेख किया गया है। भक्त इस दिन केले के पौधे का पूजन करते हैं क्योंकि माना जाता है की इसमें भगवन विष्णु बसते हैं। मनोभाव से पूजन करने से भगवान व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी करते हैं। इस दिन भक्त ईश्वर की आराधना के लिए पीले वस्त्र धारण करते हैं। साथी ही दान के लिए भी इसी रंग की वस्तु का उपयोग होता है। भगवन को गुड़ और चना दाल का भोग भी लगाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, विष्णु के परमभक्त देवर्षि नारद उनसे आत्मा का ज्ञान लेना चाहते थे लेकिन वे जब भी श्रीहरि से इसके बारे में अपनी इच्छा प्रकट करते तो भगवान कहते कि पहले उस ज्ञान के योग्य बनना होगा। नारद जी ने स्वयं को उस ज्ञान के योग्य बनाने के लिए कठोर तप किया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। इसके पश्चात वे पृथ्वी लोक के भ्रमण पर चले गए। इस दौरान उन्होंने एक जगह पर देखा कि भगवान श्रीहरि एक मंदिर में बैठे हैं और वृद्ध महिला उनको कुछ खिला रही है। विष्णु के वहां से प्रस्थान करने के बाद नारद मुनि वहां पहुंचे और वृद्ध महिला से जानना चाहा कि वह भगवान को क्या खिला रही थीं। उस वृद्ध महिला ने बताया कि उसने भगवान विष्णु को गुड़ और चने प्रसाद स्वरुप खिलाएं। ऐसा कहा जाता है कि नारद जी वहां पर व्रत करने लगे और लोगों में प्रसाद स्वरुप गुड़-चना बांटने लगे। कुछ समय पश्चात भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए और नारद मुनि से कहा कि सच्चे मन से जो भक्त भक्ति करता है, वह ज्ञान का अधिकारी होता है। भगवन ने उस वृद्ध महिला को वैकुण्ठ जाने का आशीर्वाद दिया और कहा कि जो भक्त उनको गुड़ और चना का भोग लगाएगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

पीले रंग का है विशेष महत्व

गुरुवार को भगवान विष्णु के उपासक व्रत एवं साधना के लिए पीले रंग का वस्त्र और पीली रंग से बनी वस्तुएं ही ग्रहण करते हैं। दान में भी पीले रंग की वस्तु का ही उपयोग उत्तम माना गया है।

गुड़-चना दाल का भोग ईश्वर को प्रिय

शास्त्रों में बताया गया है कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को भोग में गुड़ और चना दाल ही पसंद है। इसलिए गुरुवार के पूजन में व्रतधारी भगवन को इसी का भोग लगाता है।