भारत की संस्कृति बहुत विशाल है। यहां कई धर्म और संप्रदायों के स्त्री पुरुष रहते हैं। लेकिन हमारे बीच एक ऐसा समुदाय भी है जो न स्त्री है और न ही पुरुष।

हम बात कर रहे हैं किन्नरों की। यह पढ़कर आपको जरूर अजीब लगेगा कि भारत के दक्षिण में स्थित तमिलनाडु राज्य में किन्नरों के देवता निवास करते हैं। ये देवता हैं 'अरावन'। इन्हें कई स्थानों पर 'इरावन' के नाम से भी जाना जाता है।

अरावन, किन्नरों के देवता है, इसलिए दक्षिण भारत में किन्नरों को अरावनी कहा जाता है। किन्नर और अरावन देवता के बारे में सबसे हैरान करने वाली बात यह है की किन्नर अपने आराध्य देव अरावन से वर्ष में एक बार विवाह करते है।

हालांकि यह विवाह मात्र एक दिन के लिए होता है। अगले दिन अरावन देवता की मौत के साथ ही उनका वैवाहिक जीवन खत्म हो जाता है।

अर्जुन के पुत्र थे अरावन

महाभारत ग्रंथ में वर्णित है कि 'एक बार अर्जुन को, द्रौपदी से विवाह की शर्त का उल्लंघन के कारण इंद्रप्रस्थ से निष्काषित कर दिया गया। अर्जुन को एक वर्ष की तीर्थयात्रा पर भेजा जाता है। वहां से निकलने के बाद अर्जुन उत्तर पूर्व भारत में जाते है।

जहां उनकी मुलाक़ात एक विधवा नाग राजकुमारी उलूपी से होती है। दोनों को एक दूसरे से प्रेम हो जाता है और दोनों विवाह कर लेते है। विवाह के कुछ समय पश्चात, उलूपी एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम अरावन रखा गया।

पुत्र जन्म के पश्चात अर्जुन, उन दोनों को वही छोड़कर अपनी आगे की यात्रा पर निकल जाते हैं। अरावन नागलोक में अपनी मां के साथ ही रहने चले जाते हैं। युवा होने पर वो नागलोक छोड़कर अपने पिता के पास आते हैं। तब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध चल रहा होता है, इसलिए अर्जुन उसे युद्ध करने के लिए रणभूमि में युद्ध करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

मरने से पहले अजीब शर्त

महाभारत युद्ध में एक समय ऐसा आता है, जब पांडवो को अपनी जीत के लिए मां काली के चरणो में स्वयं की इच्छा से की गई नर बलि हेतु एक राजकुमार की जरुरत पड़ती है। जब कोई भी राजकुमार आगे नहीं आता है तो अरावन खुद को इस परंपरा को पूरा करने के लिए आगे आ जाते हैं।

लेकिन वो शर्त रखते हैं कि, 'वह अविवाहित नहीं मरेंगे। तब भगवान श्री कृष्ण स्वंय को मोहिनी रूप में बदलकर अरावन से शादी करते हैं। अगले दिन अरावन स्वयं अपने हाथों से अपना शीश मां काली के चरणों में अर्पित कर देते हैं।

पढ़ें : यहां होता है किन्नरों का विवाह

अरावन की मृत्यु के पश्चात श्री कृष्ण उसी मोहिनी रूप में काफी देर तक उसकी मृत्यु का विलाप भी करते हैं। कृष्ण पुरुष होते हुए स्त्री रूप में अरावन से शादी रचाते हैं, इसलिए किन्नर, जो की स्त्री रूप में पुरुष माने जाते है, भी अरावन से एक रात की शादी रचाते है और उन्हें अपना आराध्य देव मानते है।