मदर्स डे दुनिया भर में मनाया जाता है। भारत में मदर्स डे मई माह के दूसरे रविवार को मनाते हैं। मदर्स डे का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। प्राचीन ग्रीक और रोमन इतिहास में मदर्स डे को मनाया जाता था। इसके पीछे कई धार्मिक कारण जुड़े थे।

इंग्लैंड : इंग्लैंड में 17वीं शताब्दी में 40 दिनों के उपवास के बाद चौथे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता था। इस दौरान लोग चर्च में प्रार्थना के बाद छोटे बच्चे फूल या उपहार लेकर अपने-अपने घर जाते थे।

बोलिविया: बोलिविया दक्षिणी अमेरिका का एक देश है। यहां 27 मई को मदर्स डे मनाया जाता हैं। यहां मदर्स डे का मतलब कोरोनिल्ला युद्घ को स्मरण करना है। दरअसल 27 मई 1812 को यहां के कोचाबाम्बा शहर में युद्ध हुआ। कई महिलाओं का स्पेनिश सेना द्वारा कत्ल कर दिया गया। ये सभी महिलाएं सैनिक होने के बावजूद मां भी थीं। इसलिए 8 नवंबर 1927 को यहां एक कानून पारित किया गया कि यह दिन मदर्स डे के रूप में मनाया जाएगा।

युगोस्लाविया: युगोस्लाविया में मदर्स डे का चलन 19वीं शताब्दी तक बिल्कुल खत्म हो गया था हालांकि मदर्स डे मनाने की आधुनिक शुरुआत का श्रेय अमेरिकी महिलाओं, जूलिया बार्ड होवे और ऐना जार्विस को जाता है।

वर्जिनिया: वर्जिनिया में मदर्स डे की शुरुआत वेस्ट एना जार्विस के द्वारा समस्त माताओं के लिए खासतौर पर की गई, ताकि उनके पारिवारिक एवं उनके आपसी संबंधों को सम्मान मिले। यह दिवस अब दुनिया के हर कोने में अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है।

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बिट्रेन: ब्रिटेन में कई प्रचलित परम्पराएं हैं जहां एक विशिष्ट रविवार को मातृत्व और माताओं को सम्मानित किया जाता है, जिसे मदरिंग सन्डे कहा जाता था। 1912 में एना जार्विस ने 'सेकंड सन्डे इन मे' और 'मदर डे' कहावत को ट्रेडमार्क बनाया तथा मदर डे इंटरनेशनल एसोसिएशन गठित किया जाता है।

चीन: चीन में, मातृ दिवस के दिन उपहार के रूप में गुलनार का फूल बच्चे अपनी मां को देते हैं। ये दिन गरीब माताओं की मदद के लिए 1997 में निर्धारित किया गया था। खासतौर पर लोगों को उन गरीब माताओं की याद दिलाने के लिए जो ग्रामीण क्षेत्रों, जैसे कि पश्चिम चीन में रहती थीं।