मल्टीमीडिया डेस्क। हिंदू धर्म में शंख को विजय, समृद्धि, शुभ और यश का प्रतीक माना गया है। कई देवी-देवताओं को शंख लिए हुए दिखाया गया है। हर देवी-देवता के शंख का नाम भी होता है।

उत्सव, पर्व, पूजा, हवन, मंगलध्वनि, प्रयाण, आगमन, युद्ध आरंभ, विजयवरण, विवाह, विदा, राज्याभिषेक, देवार्चन आदि अवसरों पर शंख बजाया जाता है। शंख को लक्ष्मी का सहोदर और विष्णु का प्रिय माना गया है। यह विश्वास है कि जहां शंख होता है, वहां लक्ष्मी निवास करती हैं।

ऐसा शंख माना जाता है शुभ

शंख के आकार, ध्वनि और सुंदरता से उसकी गुणवत्ता तय होती है। चमकीले, सुडौल, सुंदर, स्पष्ट और मधुर ध्वनि करने वाले शंख को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। टूटे, घिसे, दरारयुक्त, चटके, बेसुरी आवाज वाले शंख का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उन्हें नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए।

शंख के हैं ये फायदे

दक्षिणवर्ती शंख जिस परिवार में स्थापित रहता है, वहां दरिद्रता नहीं रहती, शांति और समृद्धि का निवास होता है।शंख में शुद्ध जल भर कर व्यक्ति, वस्तु, स्थान पर छिड़कने से दुर्भाग्य, अभिशाप, अभिचार और दुर्ग्रह के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। जादू, टोना, नजर जैसे प्रभावों का इससे नाश होता है।

सांस की परेशानी, दिल के रोगियों के लिए फायदेमंद

वैज्ञानिक आधारों पर यह सिद्ध हो चुका है कि शंख की तीक्ष्ण ध्वनि से वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया कम हो जाते हैं। जो लोग शंख बजाते हैं, उन्हें श्वास संबंधी रोग नहीं होते। मान्यता है कि शंख बजाने वाले घरों में देवताओं का वास होता है।

रोजाना पांच से दस मिनट तक शंख बजाने वालों की श्वास की गति अति स्वाभाविक होती है। ऐसे लोगों की आयु लंबी होती है। शंख वादन स्त्रियों और पुरुषों दोनों ही कर सकते हैं।

इन बातों का भी रखें ध्यान

घर में दो शंख नहीं रखने चाहिए, हालांकि मंदिरों और देव स्थानों में दो या इससे अधिक शंख भी हो सकते हैं। तंत्र शास्त्र में दक्षिणवर्ती शंख को ज्यादा महत्व दिया गया है। शोभा की दृष्टि से भी सुंदर और उत्तम माना जाता है।

गृहस्थ आश्रमों में रखे जाने वाले शंख भी निर्दोष होने चाहिएं। शंख शिखर सुरक्षित होने पर ही शंख का प्रभाव होता है। दक्षिणवर्ती शंख तोड़े या बजाय नहीं जाते लेकिन यदि वह श्वेतवर्णी और बजाने योग्य भी हो तो इसे पूजा में रखना शुभ माना जाता है। इसकी प्रतिमाओं के समान ही पूजा करनी चाहिए।

ऐसे करें शंख की पूजा

शंख को खरीदने के बाद उसे गंगाजल से स्नान करवाना चाहिए। गंगाजल न मिले तो गाय का कच्चा दूध भी उपयोग किया जा सकता है। इसके बाद शंख को पोंछकर सफेद चंदन, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप से उसकी विधि-विधान के साथ पूजन करें और भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी से आग्रह करें कि वे शंख में निवास करें।

रोजाना पूजा के समय इसी तरह से शंख की पूजा करनी चाहिए। शंख पूजा के लिए कई मंत्रों के बारे में बताया गया है, लेकिन आप- श्री लक्ष्मी सहोदराय नम: या श्री पयोनिधि जाताय नम: का जाप कर सकते हैं, जो सबसे आसान हैं।