नई दिल्ली। हिंदुस्तान में विवाह को एक पवित्र और जन्म-जन्मांतर तक साथ निभानेवाला रिश्ता माना जाता है। इस रिश्ते के लिए जब पहल की जाती है तो विचारों के मिलने से लेकर स्वभाव के सौम्यता तक की जानकारी जुटाई जाती है, लेकिन शादी के बंधन में बंधने के लिए भारत में सबसे जरूरी चीज कुंडली का मिलान होता है, जिसके जरिए रिश्ते को अंतिम रूप दिया जाता है।

सात जन्मों के इस बंधन को बांधने से लेकर निभाने तक के लिए कुंडली में ग्रहों की स्थिति का अध्ययन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि कुंडली में यदि लड़के और लड़की के गुणों का सही और सटीक मिलान हो जाता है तो जिंदगी के आगे की राह काफी सहज, सरल और सुगम हो जाती है।

इसलिये आज भी हिंदुस्तान का आम नागरिक शादी से पहले कुंडली मिलान को प्राथमिकता देता है। कहा जाता है कि कुंडली से व्यक्ति के चरित्र से लेकर उसके स्वभाव और कारोबार या नौकरी से लेकर उसकी आर्थिक हालत तक का पता लगाया जा सकता है।

जब लड़के-लड़की की कुंडली मिलाई जाती है तो गुणों का मिलान कर इस बात की तसल्ली की जाती है कि शादी सफल होगी और इस शादी को करने के बाद दोनो का जीवन सफलता की लंबी उड़ान भरने में कामयाब होगा। कुछ दोष होने पर कुछ लोग उस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाते हैं। इनमें प्रमुख है नाड़ीदोष और मंगल दोष। कुंडली के अनुसार सगोत्रिय विवाह का भी निषेध बताया गया है।