अमूमन हम सभी जानते हैं कि भगवान विश्‍वकर्मा को देवताओं का देवशिल्पी कहा जाता है। विश्वकर्मा को अगर दुनिया का सबसे महान इंजीनियर कहें तो गलत नहीं होगा। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार देवताओं के लिए भवनों, महलों व रथों आदि का निर्माण विश्वकर्मा ही करते थे।

रामसेतु का निर्माण

वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम के आदेश पर, समुद्र पर पत्थरों से पुल का निर्माण किया गया था। रामसेतु का निर्माण मूल रूप से नल-नील नाम के वानर ने किया था। नल-नील देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा के पुत्र थे।

महादेव का रथ निर्माण

महाभारत के अनुसार तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के नगरों का विध्वंस करने के लिए भगवान महादेव जिस रथ पर सवार हुए थे, उस रथ का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। वह रथ सोने का था। उसके दाहिने चक्र में सूर्य और बाएं चक्र में चंद्रमा विराजमान थे। दाहिने चक्र में बारह आैर तथा बाएं चक्र में 16 आरे लगे थे।

द्वारिका नगरी का निर्माण

भागवत के अनुसार द्वारिका नगरी का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। उस नगरी में विश्वकर्मा का विज्ञान (वास्तु शास्त्र व शिल्पकला) की निपुणता प्रकट होती थी। द्वारिका नगरी की लंबाई-चौड़ाई 48 कोस थी। उसमें वास्तु शास्त्र के अनुसार बड़ी-बड़ी सड़कों, चौराहों और गलियों का निर्माण किया गया था।

सोने की लंका

वाल्मीकि रामायण के अनुसार सोने की लंका का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। लंका का निर्माण भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए बनवाया था। बाद में रावण के पिता ने रावण की मां के कहने पर शिव से मांग ली थी। इस तरह सोने की लंका बाद में रावण की हो गई।