माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सूर्य नारायण की पूजा-अर्चना के लिए श्रेयस्कर मानी गई है। इस तिथि को अचला सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी कहते हैं। यदि यह रविवार के दिन हो तो इसे अचला भानु सप्तमी भी कहा जाता है। आरोग्य सप्तमी का यह पावन पर्व इस वर्ष12 फरवरी को मनाया जाएगा। सप्तमी तिथि को भगवान सूर्य का आविर्भाव हुआ और इसी दिन सारे जगत को अपने प्रकाश से आलोकित किया था। उन्हें अपनी भार्या संज्ञा उत्तरकुरु में एवं संतानें भी सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुईं, अत: सप्तमी तिथि भगवान सूर्य को अतिप्रिय है। विश्वकर्मा से भगवान सूर्य ने इसी दिन अपना उत्तम दिव्य रूप प्राप्त किया था, इसलिए इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

यह सप्तमी पुण्यदायिनी, पापविनाशिनी तथा कल्याणकारी है। भविष्य पुराण के अनुसार श्री कृष्ण ने सूर्य को संसार के प्रत्यक्ष देवता बताते हुए कहा है कि इनसे बढ़कर दूसरा कोई देवता नहीं है। सम्पूर्ण जगत इन्हीं से उत्पन्न् हुआ है और अंत में इन्हीं में विलीन हो जाएगा। उनके उदय होने से ही सारा संसार चेष्टावान होता है एवं उनके हाथों से लोकपूजित ब्रह्मा और विष्णु तथा ललाट से शंकर उत्पन्न् हुए हैं।

आरोग्य के लिए सूर्योपासना

सूर्य की रोगशमन शक्ति का उल्लेख वेद, पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है। इनमें यह भी लिखा है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है। पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते है, उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं। आज भी सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। शारीरिक कमजोरी, हड्डियों की कमजोरी या जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों में भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलने की संभावना बनती है। सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि नष्ट हो जाते हैं व नेत्रज्योति बढ़ती है, ऐसा धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है।

वाल्मिकी रामायण में एक प्रसंग के अनुसार जब रावण से युद्ध करते हुए श्री राम थक गए और उस समय उस युद्ध को देखने आए महर्षि अगस्त्य ने श्री राम में नव ऊर्जा का संचार करने के लिए उन्हें सूर्य की स्तुति, आदित्य हृदय स्त्रोत के माध्यम से करने की आज्ञा दी और उसे करने के उपरांत श्री राम युद्ध में विजयी हुए। यदि निराशा से ग्रसित व्यक्ति यह पाठ करे तो उसका मनोबल पुष्ट होता है। सफेद दाग एवं सभी कुष्ठ रोगों के उपचार में सूर्योपासना सहायक सिद्ध हुई है। हमारे ऋषि-मुनि सूर्य की इस शक्ति से परिचित थे इसी कारण वास्तुशास्त्र में पूर्व और उत्तर की ओर अधिक खुला स्थान एवं दरवाजे, खिड़कियां रखने की सलाह दी जाती है ताकि प्रात:कालीन सूर्य की किरणें घर व आंगन में अधिक से अधिक मात्रा में प्रवेश कर सकें और रोग फैलाने वाले हानिकारक कीटाणु घर में नहीं पनप सकें।

ऐसा कहते है शास्त्र-

इस सप्तमी से संबंधित कथा का उल्लेख भविष्य पुराण मैं मिलता है। कथा के अनुसार श्री कृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। अपने इसी अभिमान के मद में उन्होंने तप के कारण दुबल हुए दुर्वासा ऋषि का अपमान कर दिया। शाम्ब की इस धृष्टता को देखकर उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ से ग्रसित होने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्री कृष्ण ने शाम्ब को सूर्य भगवान की उपासना करने को कहा। शाम्ब ने आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना आरंभ कर दी जिसके फलस्वरूप उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति मिल गई। इस सप्तमी को सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना जो श्रद्धालु विधिवत तरीके से करते हैं उन्हें आरोग्य, अच्छी संतान, धन-ऐश्वर्य व मान-सम्मान की प्राप्ति होती है ।

इस तरह करें सूर्य पूजन

इस दिन प्रात: जल्दी उठकर किसी जलाशय, नदी अथवा घर में ही ताजा जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल पुष्प, लाल चन्दन, तिल आदि डालकर 'ॐ घृणि सूर्याय नम:’ मन्त्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें, अर्घ्य देते समय आपकी दृष्टि गिरते हुए जल में प्रतिबिंबित सूर्य की किरणों पर होनी चाहिए। तिल के तेल का दीपक इस दिन सूर्यनारायण के निमित्त अर्पित करें और संभव हो सके तो आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी करें। इस दिन अपाहिजों, गरीबों तथा ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरत की वस्तुएं देनी चाहिए।

आज के दिन सूर्य उपासना करने वालों के लिए एक समय नमक रहित भोजन अथवा फलाहार करने का विधान है। पुराणों के अनुसार व्रती को नीले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए अन्यथा पूजा निष्फल हो जाती है। पापों का हरण करने वाली इस रथ सप्तमी को भगवान सूर्य के निमित्त किया गया स्नान, दान, हवन, पूजा आदि सत्कर्म हजार गुना फलदायक हो जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार सूर्यनारायण का पूजन करने वाला व्यक्ति प्रज्ञा, मेधा तथा सभी समृद्धियों से संपन्न होता हुआ चिरंजीवी होता है। यदि कोई व्यक्ति सूर्य की मानसिक आराधना भी करता है तो वह समस्त व्याधियों से रहित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता है।

- अनिता जैन, वास्तुविद् एवं लेखिका