रायपुर। वर्तमान में विवाह के लिए कारक माने जाने वाले गुरु तारा के अस्त होने और शुक्र तारा के मलीन होने के कारण विवाह संस्कार करना शुभ नहीं माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र पर भरोसा करने वाले परिवारों में इसी वजह से विवाह संस्कार संपन्न नहीं किए जा रहे हैं। यहां तक कि श्रीराम-सीता विवाह वाले दिन 12 दिसंबर को अगहन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वाले दिन भी तारा अस्त होने से विवाह को शुभ नहीं माना जा रहा है।

इसके चार दिन पश्चात 16 दिसंबर को सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करेगा तब खरमास शुरू हो जाएगा और अगले एक माह तक कोई भी शुभ संस्कार नहीं किया जा सकेगा। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही शुभ संस्कारों पर रोक लग जाएगी। इसे हिन्दू पंचांग के अनुसार खरमास (धनुर्मास)कहा जाता है।

मकर संक्रांति तक लगी रहेगी रोक

ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार 16 दिसंबर को सूर्य जो है वह धनु राशि में प्रवेश करेगा। इसी दिन से खरमास शुरू हो जाएगा। चूंकि हिन्दू धर्मग्रंथों में खरमास के दौरान किसी भी तरह का संस्कार संपन्न करना शुभ नहीं माना जाता इसलिए पूरे माहभर सगाई, विवाह समेत जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश आदि संस्कार नहीं किए जा सकेंगे।

एक माह पश्चात 14 जनवरी को जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा। जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है इस दिन से सूर्य उत्तरायण की स्थिति में आता है। इसे शुभ समय माना जाता है। सूर्य के उत्तरायण की स्थिति में आने के बाद ही शुभ संस्कार शुरू होंगे।

तिल-गुड़ का दान करने की मान्यता

मकर संक्रांति पर तिल, गुड़ का दान करने की मान्यता के चलते घर-घर में तिल के लड्डू का भोग अर्पित करके दान करने की परंपरा निभाई जाएगी।

मृत्यु शैया पर भीष्म पितामह ने किया था उत्तरायण का इंतजार

महाभारत ग्रंथ में उल्लेख है कि खरमास को अशुभ माने जाने के कारण इच्छा मृत्यु का वरदान पाने वाले भीष्म पितामह ने भी तीरों की शैय्या पर लेटे-लेटे सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था। जब सूर्य ने धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश किया यानि उत्तरायण की स्थिति में आया तब भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे। ऐसी मान्यता है कि खरमास के दौरान यदि किसी की मृत्यु होती है तो उसे स्वर्ग में जगह नहीं मिलती। खरमास को अशुभ माने जाने के कारण ही किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं करने की परंपरा चली आ रही है।

इन संस्कारों पर लगेगी रोक

1-जनेऊ संस्कार

2-मुंडन संस्कार

3-गृह प्रवेश

4-पाणीग्रहण यानी विवाह संस्कार