- आर. डी. सिंह

जो मनुष्य अपने माता-पिता, बड़े-बुजुर्गों का आदर-सत्कार नहीं करते, श्राद्ध-तर्पण आदि संस्कार नहीं करते, उनके परिवार में रोग, दुख, कष्ट, आर्थिक परेशानी, ऋण का भार, विवाह-बाधा व असफलता जैसी अनेक नकारात्मक स्थितियां जीवन भर बनी रहती हैं। इसीलिए पितृदोष व मातृदोष से मुक्ति के अनेक आसान उपाय इस तरह हैं।

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  1. हर अमावस्या और मंगलवार के दिन सवेरे शुद्ध होकर स्टील के लोटे या कटोरे में पानी, गंगाजल और काले तिल डालकर दक्षिणमुखी होकर पितरों को जल का तर्पण करें और जल देते समय 3 बार ऊं सर्वपितृदेवाय नम: बोलें और पितरों से सुख-शांति व काम रोजगार दिलाने के लिए प्रार्थना करें।
  2. हर अमावस्या खास तौर पर सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या और शनैश्चरी अमावस्या को सवेरे खीर-पूड़ी, आलू की सब्जी, खीर, बेसन का लड्डू, केला व दक्षिणा और सफेद वस्त्र किसी ब्राह्मण को दें और आशीर्वाद लें। इससे हमारे पितृ अत्यंत प्रसन्ना होते हैं और सारे दोषों से मुक्ति दिलाते हैं।
  3. पूरे श्राद्ध सवेरे पितरों को पानी, गंगाजल व काले तिल मिलाकर जल अर्पित करें।
  4. सोमवार के दिन आक के 21 पुष्पों व कच्ची लस्सी, बेलपत्र के साथ शिव पूजन करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
  5. पितृदोष होने पर किसी गरीब कन्या के विवाह में सहायता करने से दोष से राहत मिलती है।
  6. रविवार की संक्रांति या रवि वासरी अमावस्या को ब्राह्मणों को भोजन, लाल वस्तुओं का दान, दक्षिणा एवं पितरों का तर्पण करने से पितृदोष की शांति होती है।
  7. हर अमावस्या के दिन पितरों का ध्यान करते हुए पीपल पर कच्ची लस्सी, गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल, पुष्प इत्यादि चढ़ाएं और 3 बार ऊं पितृभ्य: नम: बोलें। पितरों से सुख शांति की प्रार्थना करें।

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इन उपायों के अतिरिक्त सर्प पूजा, ब्राह्मणों को, गोदान, कुआं खुदवाना, पीपल व बरगद के वृक्ष लगवाना, विष्णु-मंत्रों का जाप करने से, श्रीमद्भागवद गीता का पाठ करने से, माता-पिता का आदर करने से, पितरों के नाम से अस्पताल में दान करने से, मंदिर, विद्यालय व धर्मशाला बनवाने से भी पितृदोषों की शांति होती है।