उज्जैन (मप्र)। राजाधिराज महाकाल को श्रृंगार के समय पहनाए जाने वाले चांदी के नागकर्ण, मुंडमाला और मुकुट का वजन आधा होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने ज्योतिर्लिंग क्षरण को रोकने के लिए यह सिफारिश की है।

कलेक्टर मनीषसिंह ने विशेषज्ञों की सिफारिश पर तुरंत अमल करते हुए मातहतों को कम वजन के नए आभूषण बनाने के निर्देश दिए हैं। कमेटी की दो अन्य सिफारिशें पर भी तुरंत अमल शुरू हो गया है।

शुक्रवार को एक्सपर्ट कमेटी में शामिल भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण भोपाल के डायरेक्टर मदनसिंह चौहान, डिप्टी डायरेक्टर हेमराज सूर्यवंशी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के डिप्टी डायरेक्टर जनरल एलएल विश्वकर्मा ने महाकाल मंदिर का निरीक्षण कर मंदिर समिति द्वारा ज्योतिर्लिंग क्षरण को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों का जायजा लिया। कमेटी समिति द्वारा उठाए जा रहे कदमों से संतुष्ट नजर आई। सदस्यों ने कहा कि मंदिर समिति ने सुप्रीमकोर्ट में दिए अपने हलफनामे पर 99 फीसदी अमल किया है।

तीन सुझाव जिस पर अमल शुरू हुआ

अाभूषण का वजन कम करें : राजाधिराज महाकाल को श्रृंगार के समय वर्तमान में चार किलो चांदी के नागकर्ण व मुंडमाला तथा करीब छह किलो वजनी मुकुट व छत्र धारण कराया जाता है। कमेटी का सुझाव है कि अधिक वजन के आभूषण धारण कराने से ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो सकता है। इसका वजन आधा किया जाना चाहिए।

कलेक्टर ने गठित की कमेटी : कलेक्टर मनीषसिंह ने दो व तीन किलो वजन के आभूषण बनाने के लिए कमेटी गठित कर दी है। नायब तहसीलदार मूलचंद जूनवाल को इसके लिए अधिकृत किया है। कमेटी में पुजारी प्रदीप गुरु व पं.आशीष पुजारी शामिल रहेंगे। कम वजन के तीन से चार जोड़ आभूषण बनाए जाएंगे। कलेक्टर ने बताया कम वजन के आभूषण के टूटने का अंदेशा रहता है। कभी ऐसा हुआ तो भगवान के शृंगार में व्यवधान उत्पन्न् नहीं होगा।

गर्भगृह में एक्जॉस्ट फेन लगाएं : एक्सपर्ट कमेटी ने सुझाव दिया कि तड़के चार बजे होने वाली भस्मारती में भगवान को भस्मी अर्पित करते समय गर्भगृह में धूल कण की मौजूदगी 7.2 पीएच होती है। अधिक देर तक धूल कण गर्भगृह में मौजूद रहने से ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंच सकता है। अत: धूल कण को बाहर निकालने के लिए एक्जॉस्ट लगाएं।

एक्जास्ट खरीदी के आदेश दिए : कलेक्टर ने एक्जॉस्ट फैन खरीदने के लिए अधिकारियों को आदेश दिए हैं। एक सप्ताह के भीतर नए एक्जॉस्ट फेन गर्भगृह में लगा दिए जाएंगे।

गर्भगृह का तापमान 22 डिग्री से अधिक न हो : एक्सपर्ट कमेटी ने सुझाव दिया कि गर्भगृह का तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। इससे अध्ािक तापमान रहने पर बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। इससे ज्योतिर्लिंग का नुकसान पहुंच सकता है।

स्वेटर-जैकेट पहनें पुजारी : एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर तुंरत अमल करते हुए कलेक्टर ने गर्भगृह का तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम तापमान में बैठने पर अगर पुजारियों को परेशानी आए, तो स्वेटर व जैकेट पहनकर पाट पर बैठें। गौरतलब है कि मंदिर समिति ने एक पखवाड़े पहले ही गर्भगृह में नया एसी सिस्टम लगाया है।