जिस तरह रक्षा बंधन का विशेष महत्व है उसी प्रकार भाई दूज का भी अपना विशेष महत्व होता है। इस दिन बहनें भाई की लंबी आयु और उनके स्वास्थ्य की मंगल कामना का व्रत रखती हैं। इस पर्व को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। भारत में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कई लोग इसे भाऊ दूज, भाई टीका, टीका और भाई फोटा के नाम से मनाते हैं।

भाई-दूज के दिन भाई के माथे पर लगाया जाने वाला तिलक भी बहुत खास होता है। इसे खासतौर पर घर में ही तैयार किया जाना चाहिए। तिलक के इस घोल में केसर जरूर मिलाएं। उसे तरल बनाने के लिए पानी के बजाए दूध, खासतौर पर कच्चे दूध का प्रयोग करें। इसके अलावा सफेद चंदन, लाल चंदन और थोड़ी सी हल्दी मिलाएं। तिलक में लाल रंग देने के लिए थोड़ा कुमकुम मिलाएं।

इस तरह तैयार किया गया है, तिलक बहुत शुभ माना जाता है और भाई-दूज के बाद भी इसे लगाया जा सकता है। भाई सुबह नौकरी या काम पर जाए तो यह तिलक लगाए और घर लौटकर भी लगाएं। इससे भाई-बहन के बीच प्यार बना रहेगा और दोनों को कभी अशुभ नहीं होगा।

ऐसे करें भाई की पूजा

सबसे पहले बहनें चावल के आटे से चौक तैयार करें। इस चौक पर भाई को बैठाए फिर उनके हाथों की पूजा करें।

किसी-किसी जगह पर इस दिन बहने अपने भाइयों की आरती भी उतारती हैं और फिर हथेली में कलावा बांधती हैं।

भाई का मुंह मीठा करने के लिए भाइयों को मिश्री खिलाना चाहिए। शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर दीये का मुख दक्षिण दिशा की ओर करके रखें।

दोपहर के समय बहन के घर जाकर भोजन करने का विशेष महत्व होता है। पूजन के बाद भाइयों को बहन के घर भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से भाई को लंबी उम्र की प्राप्ति होती है।

बहन के घर पर भाई को भोजन कराने का विशेष महत्व माना जाता है। यदि अपनी सगी बहन ना भी हो तो किसी भी बहन के साथ इस परंपरा का निर्वहन कर सकते हैं।