- पं. धर्मेंद्र शास्त्री

विद्यार्थी शिक्षक एवं अन्य सभी देवी सरस्वती का पूजन करें व गरीब छात्रों को पुस्तक पेन कॉपी आदि विद्या उपयोगी वस्तु का दान करें एवं सरस्वती मंत्र का जाप करें कई स्थानों पर सामूहिक सरस्वती पूजन के भी आयोजन होते है।

इस दिन सारस्वत शक्तियों के पुनर्जागरण होता है। वसंत पंचमी के दिन सबसे अधिक विवाह होते एवं इस दिन गृह प्रवेश वाहन क्रय भवन निर्माण प्रारंभ विद्यारंभ ग्रहण करना अनुबंध करना आभुषण क्रय करना व अन्य कोई भी षुभ एवं मांगलिक कार्य सफल होते है।

  • प्रगट नवरात्री: चैत्र नवरात्री (धर्म की प्रतीक)
  • गुप्त नवरात्री: आषाड़ नवरात्री (अर्थ की प्रतीक)
  • प्रगट नवरात्री: आश्विन नवरात्री (काम की प्रतीक)
  • गुप्त नवरात्री: माघ नवरात्री (मौक्ष की प्रतीक)

प्रत्येक वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। देवी सरस्वती के इस प्राकट्य पर्व को सर्वसिद्धि दायक पर्व माना जाता है। माघ माह में जब सूर्य देवता उत्तरायण रहते हैं ऐसे में गुप्त नवरात्रि के मध्य पंचमी तिथि को लोक प्रसिद्ध स्वयंसिद्ध मुहूर्त के रूप में माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार यह दिन प्रत्येक शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ माना जाता है। साहित्य मनीषियों और कवियों ने इस दिन को अपने-अपने तरीके से परिभाषित किया है। यह विद्याकी अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना का दिन है।

इस तिथि को वागीश्वरी जयंती और श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है।शास्त्रों में कहा गया है कि यदि यौवन हमारे जीवन का वसंत है तो वसंत इस सृष्टि का यौवन है। गीता में भी कहा गया है कि वसंत ऋतु के रूप में भगवान कृष्ण प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होते हैं।

तंत्र शास्त्रों के मुताबिक वसंत पंचमी को आकर्षण और वशीकरण के प्रयोग बहुत ही प्रभावी और शुभ फलदायी होते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से पांचवीं राशि के अधिष्ठाता भगवान सूर्य नारायण होते हैं इसलिए वसंत पंचमी अज्ञान का नाश करके प्रकाश की ओर ले जाती है।

अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन शादी-विवाह के लिए मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन विवाह गृह प्रवेश पद भार विद्यारंभ वाहन भवन खरीदना आदि कार्य अतिशुभ और विशिष्ट होते हैं।

प्रत्येक कार्य का संचालन बुद्धि विवेक और ज्ञान के आधार पर ही होता है इसलिए विद्या-बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के जन्मदिवस से किसी भी कार्य का शुभारंभ किया जाए तो वह कार्य सफल होगा।

संवत्सर चक्र का परिवर्तन वसंत पंचमी पर्व का मुख्य हेतु है। यह ग्रीष्म और शीत का संधिकाल है। हमारी सारस्वत शक्तियों के पुनर्जागरण के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। सृष्टि का संयोग इसी दिन से प्रारंभ होता है।

इसलिए इस दिन देवी सरस्वती और भगवान कृष्ण के साथ कामदेव व रति की पूजा की भी परंपरा है। इस माह को मधुमास भी कहा जाता है। सरस्वती को बुद्धि और ज्ञान के साथ ही संगीत एवं कला की देवी भी माना जाता है।