- पं. सुधांशु मिश्रा

जीवन में हर तरह की नई शुरुआत के लिए वसंत पंचमी श्रेष्ठ मुहूर्त है। यह मां सरस्वती का उत्पत्ति दिवस माना जाता है और इसलिए इस ज्ञान प्राप्ति के लिए उनकी आराधना की जाती है। वसंत जीवन के उत्साह का नाम है और इसी दिन से प्रकृति एक नई करवट लेती है और जीवन सुखदायी हो जाता है।

भारत में ऋतुओं को छह भागों में बांटा गया है और उनमें वसंत का सर्वाधिक महत्व है। इसे ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस ऋतु के आते ही प्रकृति में चारों ओर रंग ही रंग नजर आते हैं। इस समय प्रकृति का कण-कण खिल उठता है और प्रकृति के इस स्वरूप को देखकर समस्त जीव उल्लास से भर जाते हैं।

वैसे तो माघ मास का पूरा ही महीना ही उत्साह का संचार करने वाला है लेकिन फिर भी माघ शुक्ल की पंचमी यानी वसंत पंचमी विशेष महत्व रखती है। वसंत पंचमी पर्व का कई तरह से महत्व है। त्रेता में भगवान राम इसी दिन मां शबरी के आश्रम पहुंचे थे। इस दिन मां सरस्वती की उत्पत्ति भी हुई थी और इसलिए यह प्रकृति में जीवन, रस और ज्ञान के प्रसार का उत्सव भी है।

जब संसार में जीवन

ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की। लेकिन मनुष्य की रचना के बावजूद भी सभी तरफ मौन छाया रहता था। तब भगवान विष्णु की अनुमति से उन्होंने अपने कमंडल के जल से मां सरस्वती की उत्पत्ति की।

ब्रह्मा जी ने सरस्वती से वीणा बजाने को कहा और उनकी वीणा के नाद से समस्त संसार में चेतना आई। तभी से वसंत पंचमी पर मां सरस्वती के पूजन की परंपरा है। उन्हें वाणी की देवी, ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है। वे इस समस्त संसार की परम चेतना हैं।

पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्ना होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी। ज्ञान का वरदान पाने के लिए तभी से वसंत पंचमी को शुभ दिन माना जाने लगा। अक्सर इसी दिन विधारंभ संस्कार प्रारंभ किया जाता है।

वसंत पंचमी पर भगवान विष्णु और कामदेव का पूजन भी किया जाता है। इस दिन पीले वस्त्रों का विशेष महत्व है। इस दिन को सभी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। विधारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह प्रवेश के लिए वसंत पंचमी शुभ मुहूर्त है।

इस दिन को शुभ मानने के पीछे कारण यही है कि सामान्यत:यह पर्व माघ मास में आता है। माघ धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से सबसे पुण्यदायी महीना है। इसी माह में सरिता के जल में स्नान श्रेयस्कर है तो इसी माह में सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं।

निरोग के लिए सरस्वती पूजन

वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन और व्रत करने से वाणी का संयम प्राप्त होता है, स्मरण शक्ति तेज होती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पति-पत्नी और बंधु-बांधवों में कभी वियोग नहीं होता और वे सभी दीर्घायु और निरोगी रहते हैं।

इस दिन भक्ति-भावना से पूर्ण होकर श्वेत पुष्प माला धारण की हुई मां सरस्वती का पूजन करना चाहिए। इस दिन भगवती गायत्री का पूजन भी किया जाना चाहिए।