मल्टीमीडिया डेस्क। दस दिवसीय गणेश चतुर्थी का त्योहार इस बार 13 सितंबर 2018 से शुरु होकर 23 सितंबर तक चलेगा। गणपति जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था इसलिए उनकी स्थापना इसी समय में करनी चाहिए। 11:03 से 13:30 तक गणेश प्रतिष्ठा का सर्वोत्तम मुहूर्त है। वहीं, 23 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है, जिस दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन होगा।

गणेश जी की मूर्ति स्थापित कैसे करें

गणेश प्रतिमा को लाने के बाद भगवान गणेश का स्वागत करने के लिए दरवाजे पर ही उनकी आरती करें। गणपति मंत्र उच्चारण करें और शुभ मुहूर्त में गणेश जी मूर्ति की स्थापना पूजा स्थान पर करें।

गणेश जी की स्थापना के समय ही गणेश जी के स्थान के बाएं हाथ की ओर चावल या गेहूं के ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।

कलश के मुख पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें। गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक लगाएं।

गणेश चतुर्थी पूजन विधि

पूजन की शुरुआत में हाथ में अक्षत, जल एवं पुष्प लेकर स्वस्तिवाचन, गणेश ध्यान एवं समस्त देवताओं का स्मरण करें।

अब अक्षत एवं पुष्प चौकी पर समर्पित करें। इसके पश्चात एक सुपारी में मौली लपेटकर चौकी पर थोड़े-से अक्षत रख उस पर वह सुपारी स्थापित करें।

भगवान गणेश का आह्वान करें और फिर कलश पूजन करें। इसके बाद पंचोपचार या षोडषोपचार के द्वारा गणेश पूजन करें।

जनेऊ, हार, माला, पगड़ी आदि चढ़ाएं। इत्र या चंदन अर्पित करें। फूल, धूप, दीप, पान के पत्ते पर फल, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं। इसके बाद परंपरागत पूजन और आरती करें।