मल्टीमीडिया डेस्क। गणपति को विघ्नहर्ता और ऋद्धि-सिद्धी का स्वामी कहा जाता है। इनका स्मरण, ध्यान, जप, आराधना से कामनाओं की पूर्ति होती है व विघ्नों का विनाश होता है। वे शीघ्र प्रसन्न होने वाले बुद्धि के अधिष्ठाता और साक्षात् प्रणवरूप है। गणेश का मतलब है गणों का स्वामी।

गणेशजी ही एक मात्र ऐसे देवता हैं, जिन्हें दूर्वा यानि दूब चढ़ाई जाती है। यह एक तरह की घास होती है, जो गणेश पूजन में प्रयोग होती है। दूर्वा गणेशजी को अतिशय प्रिय है। इक्कीस दूर्वा को इक्कठी कर एक गांठ बनाई जाती है तथा कुल 21 गांठ गणेशजी को मस्तक पर चढ़ाई जाती है।

दूर्वा चढ़ाने के लिए जरूरी है कि वह किसी मंदिर की जमीन में उगी हुई या बगीचे में उगी हुई हो। ऐसी जगह जहां गंदा पानी बहकर जाता हो, वहां से दूर्वा का चुनाव गणेशजी पर चढ़ाने के लिए नहीं करना चाहिए। श्री गणेश को दूर्वा चढ़ाने का मंत्र श्री गणेश को 22 दूर्वा इन विशेष मंत्रों के साथ अर्पित की जानी चाहिए।

पौराणिक कथा में है दूर्वा चढ़ाने का वर्णन

एक पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। उसके कोप से स्वर्ग और धरती पर हाहाकार मचा था। अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे।

सभी ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे अनलासुर के आतंक को खत्म कर लोगों को शांति दें। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर कहा कि अनलासुर का अंत केवल श्रीगणेश ही कर सकते हैं।

तब श्रीगणेश ने अनलासुर से युद्ध कर उसके निगल लिया। मगर, इसकी वजह से उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। कई प्रकार के उपाय करने के बाद भी गणेशजी के पेट की जलन शांत नहीं हुई, तो कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर श्रीगणेश को खाने को दी। जब गणेशजी ने दूर्वा ग्रहण की तो उनके पेट की जलन शांत हो गई। तभी से श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई।

कैंसर में भी कारगर मिली

इस कथा द्वारा हमे यह संदेश प्राप्त होता है की पेट की जलन, तथा पेट के रोगों के लिए दूर्वा औषधि का कार्य करती है। मानसिक शांति के लिए यह बहुत लाभप्रद है। यह विभिन्न बीमारियों में एंटिबायोटिक का काम करती है, उसको देखने और छूने से मानसिक शांति मिलती है और जलन शांत होती है। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि कैंसर रोगियों के लिए भी यह लाभप्रद है।

गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाते वक्त गणेशजी के इन 10 मंत्रों का जाप करें। हर मंत्र के साथ दो दूर्वा चढ़ाएं और आखिरी बची दूर्वा चढ़ाते वक्त सभी नामों को एक साथ बोलें।

ॐ गणाधिपाय नमः ,ॐ उमापुत्राय नमः ,ॐ विघ्ननाशनाय नमः ,ॐ विनायकाय नमः

ॐ ईशपुत्राय नमः ,ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ,ॐ एकदन्ताय नमः ,ॐ इभवक्त्राय नमः

ॐ मूषकवाहनाय नमः ,ॐ कुमारगुरवे नमः