मल्टीमीडिया डेस्क। कलयुग में हनुमानजी को जागृत और साक्षात देव माना गया है। मान्यता है कि हनुमानजी चिरंजीवी हैं अर्थात उनको अमरत्व का वरदान प्राप्त है। इस बार 19 अप्रैल को हनुमान जयंती मनाई जाएगी।

अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।

कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।

जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।

अर्थात इन आठ लोगों (अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि) का स्मरण सुबह-सुबह करने से सारी बीमारियां समाप्त होती हैं और मनुष्य दीर्घायु को प्राप्त करता है।

मान्यता है कि सीता ने हनुमान को लंका की अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनने के बाद आशीर्वाद दिया था कि वे अजर-अमर रहेंगे। अजर-अमर का अर्थ है कि जिसे ना कभी मौत आएगी और ना ही कभी बुढ़ापा। इस कारण भगवान हनुमान को हमेशा शक्ति का स्रोत माना गया है क्योंकि वे चीरयुवा हैं।

वैसे तो हनुमानजी को सभी मनोकामनाओं की पूर्ती करने वाला देव माना जाता है। उनकी आराधना करना हमेशा शुभ फलदायी रहता है, लेकिन मंगलवार, शनिवार, हनुमान अष्टमी और हनुमान जयंती पर की गई साधना विशेष फलदायी होती है। हनुमानजी की उपासना से दुख,क्लेश, रोग और संकटों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में कई तरह से हनुमानजी की पूजा-आराधना का विधान है, लेकिन कुछ खास अवसरों पर सहज,सरल उपाय से साधक अपनी कैसी भी मुश्किल हो उससे छुटकारा प्राप्त कर धन, एश्वर्य और सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकता है।

हनुमान चालीसा के 108 पाठ से होती है मनोकामना सिद्धि

हनुमान जयंती पर सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर हनुमानजी के मंदिर जाएं। हनुमानजी को लाल गुड़हल या गुलाब के फूलों की माला समर्पित करें। सिंदूर चढ़ाएं, गुड़-चना या चिरोंजी या बूंदी के लड्डूओं की भोग लगाएं। साथ में लाल फल और श्रीफल समर्पित करें। तिल्ली या सरसों के तेल का दीपक जलाएं और धूपबत्ती प्रज्वलित करें। इसके बाद हनुमाजी के सामने कुश या ऊन का लाल आसन बिछाकर बैठें और 108 बार लगातार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

इस आराधना में यह कोशिश करें की 108 पाठ एक बैठक में हो जाएं। कोशिश करें की उठने की जरूरत न रहे। इसके साथ ही जाप वाले दिन सात्विक भोजन और ब्रहमचर्य का पालन करें। हनुमान जयंती के पावनपर्व पर एक दिन के लिए सच्चे मन से की गई इस विशेष आराधना से हनुमानजी अपने भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।