मल्टीमीडिया डेस्क। चैत माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला हनुमान जयंती पर्व इस साल 31 मार्च को मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि चैत्र मास की पूर्णिमा को ही राम भक्त हनुमान ने माता अंजनी के गर्भ से जन्म लिया था। इस अवसर पर देश-विदेश में स्थित हनुमान मंदिरों में विशेष कीर्तन-पूजन आयोजित किये जा रहे हैं।

कलियुग के एकमात्र जाग्रत देवता के रूप में पूजे जाने वाले हनुमान जी की कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रहती है। आज हम आपको देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों की बारे में हता रहे हैं जिनके दर्शन मात्र से प्राणी अपने सभी पापों से मुक्ति पा लेता है।

कपि संकट मोचन नाम तिहारो-

कहा जाता है कि हनुमानजी की पूजा करने से शनि के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। जब हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया कि उनकी भक्ति करने वालों को वह कभी पीड़ा नहीं देंगे। कन्या, तुला, वृश्चिक और शनि की अढैया वाले तथा कर्क, मीन राशि के जातकों को हनुमान जयंती पर विशेष आराधना करनी चाहिए। हनुमानजी भक्ति और शक्ति का बेजोड़ संगम हैं।

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हनुमान मंदिर, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) -

इलाहाबाद में संगम के किनारे स्थित किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा वाला प्राचीन मंदिर है। यह सम्पूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटे हुए हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है।

हनुमानगढ़ी,अयोध्या -

सरयू किनारे स्थित श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या की सबसे प्रमुख श्रीहनुमान मंदिर हनुमानगढ़ी है। जमीन से 60 सीढ़ी उपर स्थित यह मंदिर बहुत बड़ा है। हनुमानगढ़ी के दक्षिण में सुग्रीव टीला व अंगद टीला नामक स्थान हैं। इस मंदिर की स्थापना लगभग 300 साल पहले स्वामी अभया रामदास जी ने की थी।

सालासर बालाजी हनुमान मंदिर -

राजस्थान के चूरू जिले के सालासर में स्थित इस मंदिर की प्रतिमा में हनुमानजी दाढ़ी व मूंछ से सुशोभित है। इस मंदिर के संस्थापक श्री मोहनदासजी थे। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी।

हनुमान धारा, चित्रकूट -

उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के समीप यह हनुमान मंदिर स्थापित है। पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर पर दो जल के कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। इस धारा का जल हनुमानजी को स्पर्श करता हुआ बहता है।

श्री संकटमोचन मंदिर, वाराणसी -

वाराणसी में स्थित मंदिर के प्रांगण में श्रीहनुमानजी की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है। इस मूर्ति में हनुमानजी दाएं हाथ में भक्तों को अभयदान कर रहे हैं एवं बायां हाथ उनके ह्रदय पर स्थित है।

बेट द्वारका हनुमान दंडी मंदिर -

बेट द्वारका से चार मील की दूरी पर मकर ध्वज के साथ में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। कहते हैं कि पहले मकरध्वज की मूर्ति छोटी थी परंतु अब दोनों मूर्तियां एक सी ऊंची हो गई हैं। कुछ धर्म ग्रंथों में मकरध्वज को हनुमानजी का पुत्र बताया गया है, जिसका जन्म हनुमानजी के पसीने द्वारा एक मछली से हुआ था।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, मेहंदीपुर -

राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाडिय़ों के बीच बसा हुआ मेहंदीपुर नामक स्थान है। कहा जाता है कि यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमान जी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी। इसे ही श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है। इनके चरणों में छोटी सी कुण्डी है, जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता।

डुल्या मारुति, पूना -

पूना के गणेशपेठ में स्थित यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। श्रीडुल्या मारुति का मंदिर संभवत: 350 वर्ष पुराना है। मूल रूप से डुल्या मारुति की मूर्ति एक काले पत्थर पर अंकित की गई है। यह मूर्ति पांच फुट ऊंची तथा ढाई से तीन फुट चौड़ी अत्यंत भव्य एवं पश्चिम मुख है।

श्री कष्टभंजन हनुमान मंदिर, सारंगपुर -

अहमदाबाद भावनगर रेलवे लाइन पर स्थित बोटाद जंक्शन से सारंगपुर लगभग 12 मील दूर है। महायोगिराज गोपालानंद स्वामी ने इस शिला मूर्ति की प्रतिष्ठा विक्रम संवत् 1905 आश्विन कृष्ण पंचमी के दिन की थी। यह मंदिर स्वामीनारायण सम्प्रदाय का एकमात्र हनुमान मंदिर है।

7 सवाल: हनुमानजी के बारे में कितना जानते हैं आप?

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हनुमानजी की माता का क्या नाम था?

अंजनी

,

सीता

,

मेनका

,

अहिल्या

,

हनुमानजी किसके अवतार थे?

सूर्य

,

अग्नि

,

विष्णु

,

शंकर

,

हनुमानजी के गुरु कौन थे?

सूर्य

,

राम

,

ब्रह्मा

,

पवन देव

,

हनुमानजी को अपनी शक्तियां भूलने का शाप किसने दिया था?

नारद

,

इंद्र

,

देवता

,

ऋषि

,

हनुमानजी किसके धर्म पुत्र थे?

पवनदेव

,

सूर्यदेव

,

श्रीराम

,

शंकर

,

हनुमानजी के मानस पुत्र का क्या नाम था?

सूर्यध्वज

,

जांबालि

,

कपीश

,

मकरध्वज

,

हनुमानजी की माता अंजना का असली नाम क्या था?

सीता

,

पुन्जलिकस्थला

,

रोहिणी

,

वैष्णवी