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    महाशिवरात्रि 2018: विष्णु पुराण में है शिव के जन्म की कहानी, आप भी पढ़ें

    Published: Mon, 12 Feb 2018 05:05 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 09:36 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    देशभर में महाशिवरात्रि के त्यौहार की धूम है। मंदिरों में सुबह से ही भगवान शिव के अभिषेक और दर्शनों के लिए भारी भीड़ नजर आने लगी है। आज भगवान शिव का विवाह है और भक्त उसमें हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इस मौके पर हम बताएंगे कि भगवान शंकर के जन्म को लेकर हमारे पुराणों में कौन-सी प्रमुख बातें लिखी गई हैं।

    देवादिदेव महादेव को आदी, अनादी कहा जाता है, क्योंकि वह अजन्मे हैं और सृष्टी के प्रारंभ से पहले भी थे और सृष्टी के अंत के बाद भी रहेंगे। उनके जन्म का रहस्य तो दूर उनकी लीलाओं का वर्णन भी नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद सनातन संस्कृति के प्राचीन ग्रंथों में शिव जन्म के रहस्यों का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि कैसे शिव का जन्म हुआ था या उनका अवतरण हुआ था।

    विष्णु पुराण में वर्णित शिव के जन्म की कहानी शायद भगवान शिव का एकमात्र बाल रूप वर्णन है। यह कहानी बेहद रोचक और मनभावन है। इसके अनुसार ब्रह्मा को एक बच्चे की आवश्यकता थी। उन्होंने इसके लिए कठोर तपस्या की और तपस्या के परिणामस्वरूप अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए।

    ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका नाम ब्रह्मा नहीं है इसलिए वह रो रहा है। तब ब्रह्मा ने शिव का नाम रूद्र रखा जिसका अर्थ होता है रोने वाला। शिव तब भी चुप नहीं हुए। इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया पर शिव को नाम पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए। शिव पुराण के अनुसार ये नाम पृथ्वी पर लिखे गए थे।

    शिव अवतरण की पौराणिक कथा-

    शिव के इस प्रकार ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने के पीछे भी विष्णु पुराण की एक पौराणिक कथा है। इसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सिवाय कोई भी देव या प्राणी नहीं था। तब केवल विष्णु ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे। ब्रह्मा-विष्णु जब सृष्टि के संबंध में बातें कर रहे थे तो शिव जी प्रकट हुए।

    ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने दिव्य दृष्टि प्रदान कर ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया।

    कालांतर में विष्णु के कान के मैल से पैदा हुए मधु-कैटभ राक्षसों के वध के बाद जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की तो उन्हें एक बच्चे की जरूरत पड़ी और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद ध्यान आया। अत: ब्रह्मा ने तपस्या की और बालक शिव बच्चे के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए।

    किसी वेद या पूराण में भगवान शिव के जन्म के बारे में कुछ भी नहीं लिखा है। भगवान शिव के बारे में कहा जाता है शिव निरंकार है, जिसका कोई रूप नहीं होता है। शिव का आकर,शब्दों और ज्ञान की सीमा से परे है। शिव सिर्फ एक बिंदु है।

    शिवलिंग के जन्म की कथा-

    एक बार ब्रह्मा और विष्णु में एक बार श्रेष्ठता को लेकर झगड़ा हो गया और दोनो ही अपनी श्रेष्ठता का दावा करने लगे। ब्रह्मा ने कहा कि 'मैं हर जीवित अस्तित्व का पिता हूं इसमें तुम भी शामिल हो।’ विष्णु को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने ब्रह्मा से कहा कि ‘ तुम एक कमल के फूल में पैदा हुए थे, जो मेरी नाभि से निकला था। इसलिए तुम्हारा जनक मैं हूं’

    दोनों के बीच झगड़ा चल ही रहा था कि अचानक एक अग्नि स्तंभ अवतरित हुआ। वो अग्नि स्तंभ बेहद विशाल था। दोनों की आंखें उसके सिरों को नहीं देख पा रहीं थीं। दोनों के बीच तय हुआ कि ब्रह्मा आग के इस खंभे का ऊपरी सिरा खोजेंगे और विष्णु निचला सिरा। ब्रह्मा ने हंस का रूप धरा और ऊपर उड़ चले अग्नि स्तंभ का ऊपरी सिरा देखने के लिए।

    भोले शंकर के बारे में कितना जानते हैं आप?

    महाशिवरात्रि पर्व पर हिस्सा लीजिए शिवजी से जुड़े रोचक क्वीज में..

    शिवजी की कितनी पत्नियां थीं?

    2

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    1

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    3

    ,

    कोई नहीं

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    शिवजी के कितने पुत्र थे?

    2

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    4

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    5

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    6

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    शंकरजी ने कौन-सा विष पिया था?

    धतूरे का विष

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    कालकूट विष

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    भांग का विष

    ,

    जंगली-बूटी का विष

    ,

    शिवजी की बहन का नाम क्या था?

    असावरी

    ,

    खरबंगा

    ,

    व्योमा

    ,

    कोई नहीं

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    शिवजी के धनुष का नाम क्या था?

    पिनाक

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    गांडीव

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    विजय धनुष

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    कोदंड

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    शिवजी ने किसको सुदर्शन चक्र दिया था?

    विष्णु

    ,

    श्रीकृष्ण

    ,

    मां दुर्गा

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    श्री राम

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    शिव के जन्म की कथा कहां लिखी है?

    विष्णु पुराण

    ,

    शिव पुराण

    ,

    ब्रह्म पुराण

    ,

    कहीं नहीं

    विष्णु ने वाराह का रुप धारण किया और धरती के नीचे अग्नि स्तंभ का अंतिम सिरा खोजने निकल पड़े। दोनों में से कोई सफल नहीं हो सका और दोनों लौट कर वापस आ गए। विष्णु ने मान लिया कि वह निचला सिरा नहीं खोज पाए। ब्रह्मा भी ऊपरी सिरा नहीं खोज पाए थे लेकिन उन्होंने कह दिया कि वो सिरा देख कर आए हैं।

    ब्रह्मा का असत्य कहना था कि अग्नि स्तंभ फट पड़ा और उसमें से शिव प्रकट हुए। उन्होंने ब्रह्मा को झूठ बोलने के लिए फटकार लगाई और कहा कि वो इस कारण से बड़े नहीं हो सकते। उन्होंने विष्णु को सच स्वीकारने के कारण ब्रह्मा से बड़ा कहा।

    ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने मान लिया कि अग्नि स्तंभ से निकले शिव महादेव यानी किसी अन्य देव से बड़े हैं। वह उन दोनों से भी बड़े हैं क्योंकि दोनों मिल कर भी उनके आदि-अंत का पता नहीं लगा सके।

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