मल्टीमीडिया डेस्क। अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान नर-नारायण सहित परशुराम और हय ग्रीव का अवतार हुआ था। इसके अलावा, ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था।

कहते हैं इस दिन स्नान, ध्यान, जप तप करना, हवन, पितृ तर्पण, किए गए दान पुण्य का लाभ अक्षय रहता है। सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त से शादियां शुरू होंगी।

पौराणिक कहानियों के मुताबिक, इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई थी और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यह बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा। कोई भी नया काम, नया घर और नया कारोबार शुरू करने पर वह फलता फूलता है और व्यक्ति को उसमें पहचान मिलती है।

विवाह और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए अच्छा

अक्षय तृतीया के दिन ऐसे विवाह भी मान्य होते हैं, जिनका मुहूर्त साल भर नहीं निकल पाता है। अक्षय तृतीया के दिन बिना लग्न व मुहूर्त के विवाह होने से उसका दांपत्य जीवन सफल हो जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जी की उपासना और लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आज के दिन लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का भी बहुत महत्व है।

इस दिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करने से यश और लाभ मिलता है। मां लक्ष्मी के इन मंत्रों से व्यापार में उन्नति एवं आर्थिक सफलता मिलती है। इस दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए। शांत स्वाभाव से ही सबसे मिलना जुलना चाहिए। शांत मन से मां लक्ष्मी की पूजा करने से आपको अधिक फल मिलता है।

इस दिन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। घर के हर कोने को साफ करना चाहिए। गंदे स्थान पर पूजा नही करनी चाहिए।