मल्टीमीडिया डेस्क। भगवान गणेश को बल, बुद्धि, विवेक का देवता माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया हैा। मान्यता है कि श्रीगणेश की प्रथम पूजा से सभी काम निर्विघ्न संपन्न होते हैं। रोजाना देव गणपति की पूजा से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और धन-धान्य से घर संपन्न रहता है। विशेष तिथियों और त्यौहारों पर भगवान गणपति की आराधना से हर कार्य में सहजता से सिद्धि मिल जाती है।

भगवान गणेश को ऐसी ही प्रिय तिथि है चतुर्थी तिथि। संकष्टी चतुर्थी को सभी कष्टों का हरण करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान गणेश की आराधना करने से सभी तरह के कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस बार संकष्टी चतुर्थी गुरुवार 20 जून को है।

पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। यानी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना से सेहत से संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है।

संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें श्रीगणेश आराधना

संकष्टी चतुर्थी पर सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं। उसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल या पीला संभव हो तो बगैर सिलाई का वस्त्र धारण करें। भगवान गणपति की प्रतिमा या चित्र किसी पटिए पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। ध्यान रहे श्रीगणेश प्रतिमा का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की और रहे। उसके बाद दिया और धूपबत्ती प्रज्जवलित कर श्रीगणेश को चंदन, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मेंहदी, अबीर, गुलाब, और वस्त्र समर्पित करें।

ऋतुफल और मोदक का लगाएं भोग

श्रीगणेश को मोदक, लड्डू, ऋतुफल, पंचामृत और सूखे मेवे का भोग लगाएं। लाल गुलाब, गुड़हल या लाल रंग के दूसरे फूल समर्पित करें। इसके बाद घी और गुड़ की धूप लगाने के बाद गणपति अथर्वशीर्ष, गणपतिस्त्रोत या गणपति से संबंधित दूसरे शास्त्रोक्त श्लोकों का पाठ करें। भगवान श्रीगणेश को दुर्वा अतिप्रिय है इसलिए उनकी पूजा में दुर्वा जरूर शामिल करें। ध्यान रहे दुर्वा घास में कम से कम तीन या पांच पत्तियां होना चाहिए।