भोपाल। न्याय के देवता माने जाने वाले शनि 18 अप्रैल को वक्री होने जा रहे हैं। अर्थात इस दौरान वे उल्टी चाल चलेंगे। इस कारण ढैय्या व साढ़े साती से प्रभावित राशियों के जातकों को काफी राहत मिलेगी। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दौरान मंगल और शनि की युति राशि प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकती है। 18 अप्रैल से आगामी कुछ दिनों तक लाल आंधी आने की आशंका रहेगी।

30 अप्रैल तक देश में कई आपदाओं की आशंका

ज्योतिषमठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम ने बताया कि अमावस्या और पूर्णिमा के आसपास प्राकृतिक आपदाओं की आशंका सबसे अधिक रहती है। इस स्थिति में गृह योग तारीख 15 अप्रैल की अमावस्या से बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल का समय भूकंप आदि प्राकृतिक प्रकोप का प्रभाव बन रहा है। आकाशीय गृह स्थिति के अनुसार इस दौरान पृथ्वी का स्वामी मंगल 22 अंश पर शनि के साथ धनु राशि में गतिमान रहेगा। जबकि शनि के वकृतत्व का प्रभाव 12 अंश पर पृथ्वी पर पड़ेगा। इस स्थिति में शनि-मंगल की युति तथा चन्द्रमा का प्रभाव 6.3 की तीव्रता का भूकंप देने में सक्षम है। इस योग के प्रभाव से दिल्ली एवं जबलपुर क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक लगाई जा रही है।

साधु-संत एवं महात्माओं के लिए होगी अमंगलकारी

पं. विनोद गौतम ने बताया कि मंगल शनि की युति दुर्भिक्षु योग बनाती है। इसके प्रभाव से धार्मिक उन्माद ब़ढ़ता है। शेयर, व्यापार व्यवसाय भी प्रभावित होता है। शनि के वक्रीय होने से साढ़ेसाती एवं ढैय्या शनि के प्रभाव में कमी आएगी। वर्तमान समय पर वृष एवं कन्या राशि में ढैय्या शनि का प्रभाव एवं वृश्चिक, धनु तथा मकर राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है। 18 अप्रैल को शनि के वक्रीय होते ही उपरोक्त राशि वालों को शनि के प्रकोप से राहत मिलेगी। शनि की उल्टी चाल का प्रभाव धनु राशि पर साधु-संत एवं महात्माओं के लिए अमंगलकारी है।

शनि-मंगल की युति धार्मिक कार्यों व मंदिर आदि के निर्माणों की गति में रुकावट भी पैदा करेगी। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्व से ही वक्रीय चल रहे हैं। शनि के वक्रीय होते ही वक्रीय ग्रहों की संख्या चार होगी। 15 अप्रैल (रविवार) को अमावस्या से चंद्रमा भी मंगल की राशि मेष में जाएगा। शनि 6 सितंबर तक उल्टी चाल में गतिमान रहेगा।