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    अमृत योग में मनेगी शनिचरी अमावस्या, इन राशि को मिलेगा लाभ

    Published: Tue, 13 Mar 2018 04:02 AM (IST) | Updated: Tue, 13 Mar 2018 06:23 PM (IST)
    By: Editorial Team
    shani 2018313 113725 13 03 2018

    ग्वालियर। वर्ष 2018 की प्रथम शनिचरी अमावस्या 17 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन अमृत योग होने से सभी जातकों के लिए शनिचरी अमावस्या शुभ फलदायी होगी। वहीं जिन पर शनि का साढ़े साती और ढैया चल रहा है, वह शनि को प्रसन्न करने का प्रयास करें तो उनके कष्ट दूर हो जाएंगे। वहीं कर्क, कन्या, तुला, धनु व कुंभ राशियों के जातकों को लाभ मिलेगा।

    ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। वह भगवान सूर्यदेव के पुत्र है और मृत्यु के देवता यमराज के भाई हैं। जबकि उनकी माता का नाम छाया है। शनिदेव न्याय के देवता होने के कारण समय-समय पर सभी की राशियों में आते हैं और उन्हें उनके कर्मो के अनुसार अच्छे और बुरे फल देते हैं। शनिचरी अमावस्या में अमृत योग होने के चलते इस बार शनिदेव शुभ फल देंगे।

    शनिदेव से मांगे क्षमा और करें पूजन

    जिन जातकों की राशियों में शनि की साढ़े साती चल रही हैं और जो भगवान शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, वह उन्हें सरसों का तेल, तिल, काला कपड़ा आदि अर्पित करें। साथ ही भगवान शनि के मंत्रों का जाप करें।

    रोगों की शांति के लिए करें यह उपाय

    जो लोग बीमारियों से पीड़ित है, वह शनि के मंत्रों का जाप करें एवं हनुमानजी एवं भगवान शिव के मंत्रों का पाठ करें।

    इसलिए चढ़ाया जाता है तिल

    पं. सतीश सोनी के अनुसार मान्यता है कि रामायणकाल में रावण ने शनिदेव को अपने घर बंदी बना लिया था और कुण्डली में ऐसे घर में बिठा दिया था जिससे रावण की मृत्यु आसानी से नहीं होती। लेकिन शनिदेव की नजर थोड़ी से टेड़ी हो, गई जिसके कारण हनुमान जी लंका में आग लगाने में सफल हुए। लेकिन इस अग्निकाण्ड के दौरान भगवान शनिदेव भी झुलस गए थे। आग से झुलस जाने पर जलन को रोकने के लिए सरसों का तेल लगाया जाता है। तभी से भगवान शनि को सरसों का तेल चढ़ाया जाता है।

    ऐसे अर्पित करें तेल

    कई लोग भगवान शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करते हैं, लेकिन इसके बाद वह प्रतिमा को रगड़ते हैं जो कि गलत है। बताया जाता है कि भगवान की प्रतिमा को रगड़ने से शनिदेव को कष्ट होता है इसलिए उन्हें सिर के ऊपर से तेल अर्पित कर छोड़ देना चाहिए।

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