शास्त्रों में वसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से भी उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

दरअसल वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं। वसंत पंचमी के दिन विवाह या कोई अन्य मांगलिक कार्य कर सकते हैं।

अभिजित मुहूर्त

दिन मध्ये गते सूर्य मुहूर्ते हि अभिजित प्रभुः। चक्रमादाय गोविन्दः सर्वान् दोषान् निकृन्तति।।

नारद पुराण के इस श्लोक से यह स्वतः ही सिद्ध हो जाता है। जैसे विष्णु के सुदर्शन चक्र से सब शत्रु सामने नहीं आते ठीक उसकी प्रकार से अभिजित मुहूर्त के सामने सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं।

हर दिन एक अभिजित मुहूर्त होता है। यह मूहुर्त किसी भी दिन दिनार्ध (दिन का आधा) से 24 मिनट पूर्व और 24 मिनट बाद तक रहता है।

पंचांगों में दिन की गणना दी होती है उसी हिसाब से दिन का आधा समय निकाल कर अभिजित मुहूर्त की गणना कर ली जाती है।

इस समय में किया हुआ कार्य निश्चित रूप से सफल होता है। इसके अलावा किसी विद्वान ब्राहम्ण से पूछकर इस मुहूर्त में शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

वसंत पंचमी की विशेषताएं

  • माघमाह: इस महिने को भगवान विष्णु का स्वरूप बताया है।
  • शुक्ल पक्ष: इस समय चन्द्रमा अत्यंत प्रबल रहता है।
  • गुप्त नवरात्री: सिद्धी साधना गुप्तसाधनाके लिए मुख्य समय
  • उत्तरायण सूर्य: देवताओं का दिन इस समय सूर्य देव पृथ्वी के निकट रहते है।
  • वसंत ऋतु: समस्त ऋतुओं की राजा इसे ऋतुराज वसंत कहते है यह सृष्टि का यौवनकाल होता है।
  • सरस्वती जयंती: ब्रह्मपुराण के अनुसार देवी सरस्वती इस दिन ब्रह्माजी के मानस से अवतरित हुई थीं।