अजय सिंह, गोंडा। उप्र के गोंडा स्थित खरगूपुर का प्राचीन पृथ्वीनाथ मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। दावा किया जाता है कि यह एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है। किवदंती है कि द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान भीम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इसकी ऊंचाई इतनी है कि एड़ी उठाकर ही जलाभिषेक किया जाता है। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित मंदिर में महाशिवरात्रि पर देश ही नहीं, बल्कि नेपाल तक के श्रद्धालु भी दर्शन-पूजन करने आते हैं।

जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर पृथ्वीनाथ मंदिर है। मंदिर में स्थापित पांच फीट ऊंचा शिवलिंग काले पत्थरों से बना हुआ है। टीले पर स्थित इस मंदिर के बारे में जानकारों का कहना है कि मुगल सम्राट के कार्यकाल में उनके किसी सेनापति ने यहां पूजा अर्चना की थी और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया।

कालांतर में खरगूपुर के राजा मानसिंह की अनुमति से यहां के निवासी पृथ्वीनाथ सिंह ने मकान निर्माण कराने के लिए खोदाई शुरू करा दी। उसी रात पृथ्वी सिंह को स्वप्न में पता चला कि नीचे सात खंडों का शिवलिंग दबा है। उन्हें एक खंड तक शिवलिंग खोजने का निर्देश हुआ। इसके बाद शिवलिंग खोदवाकर पूजा-अर्चना शुरू करा दी।

भोले शंकर के बारे में कितना जानते हैं आप?

महाशिवरात्रि पर्व पर हिस्सा लीजिए शिवजी से जुड़े रोचक क्वीज में..

शिवजी की कितनी पत्नियां थीं?

2

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1

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3

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कोई नहीं

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शिवजी के कितने पुत्र थे?

2

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4

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5

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6

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शंकरजी ने कौन-सा विष पिया था?

धतूरे का विष

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कालकूट विष

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भांग का विष

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जंगली-बूटी का विष

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शिवजी की बहन का नाम क्या था?

असावरी

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खरबंगा

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व्योमा

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कोई नहीं

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शिवजी के धनुष का नाम क्या था?

पिनाक

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गांडीव

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विजय धनुष

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कोदंड

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शिवजी ने किसको सुदर्शन चक्र दिया था?

विष्णु

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श्रीकृष्ण

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मां दुर्गा

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श्री राम

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शिव के जन्म की कथा कहां लिखी है?

विष्णु पुराण

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शिव पुराण

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ब्रह्म पुराण

,

कहीं नहीं

कालांतर में उनके नाम पर ही पृथ्वीनाथ मंदिर विख्यात हो गया। लगभग चार दशक पूर्व पुरातत्व विभाग की जांच में पता चला कि यह एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जो 5000 वर्ष पूर्व महाभारत काल का है। मंदिर के पुजारी श्याम कुमार गोस्वामी ने बताया कि मंदिर प्राचीन महत्व का है। भक्तों का कहना है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक तथा दर्शन पूजन करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है।