मल्टीमीडिया डेस्क। हर माह में दो चतुर्थी तिथि आती है, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। शास्त्रों के अनुसार, चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश को समर्पित है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। कई स्थानों पर विनायक चतुर्थी को 'वरद विनायक चतुर्थी' के नाम से भी जाना जाता है।

जनवरी में विनायक चतुर्थी 10 जनवरी को है। इस दिन गणेश की उपासना करने से घर में सुख-समृद्धि, आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ ज्ञान एवं बुद्धि प्राप्ति होती है। कहते हैं कि चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

हालांकि, विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने में होता है, लेकिन सबसे मुख्य विनायक चतुर्थी का व्रत भाद्रपद के महीने में होता है। भाद्रपद के दौरान पड़ने वाली विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

ऐसे करें व्रत एवं पूजन

ब्रह्म मूहर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें। इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करें। दोपहर में पूजन के समय गणेश प्रतिमा स्थापित करें। संकल्प के बाद षोडशोपचार पूजन कर श्री गणेश की आरती करें और सिन्दूर चढ़ाएं। प्रतिमा पर 21 दूर्वा दल चढ़ाएं और श्री गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं।

पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें। ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें। शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें तथा 'ॐ गणेशाय नम:' मंत्र की माला जपें।