मल्टीमीडिया डेस्क। जब भी टेस्ट क्रिकेट इतिहास की बात की जाएगी तो भारत के वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाएगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि 18 साल पहले ठीक आज ही के दिन (14 मार्च 2001) इन्होंने कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में ऐसा चमत्कार किया था जिससे भारतीय टीम के प्रति फैंस का नजरिया ही बदल गया था। पहली पारी में 274 रनों से पिछड़ने के बाद फॉलोऑन में खेलते हुए इन्होंने पांचवें विकेट के लिए 376 रनों की साझेदारी की जिसकी बदौलत भारत ने आगे चलकर ऑस्ट्रेलिया से यह मैच 171 रनों से जीत कर धमाका किया।

ऑस्ट्रेलिया सीरीज के पहले मैच में भारत को रौंद चुका था। दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के पहली पारी के 445 रनों के जवाब में भारत की पहली पारी 171 पर सिमटी थी। भारत मैच के तीसरे दिन 13 मार्च को खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में 4 विकेट पर 254 रन बना चुका था। लक्ष्मण 109 और द्रविड़ 7 रन बनाकर क्रीज पर थे। सभी यह मानकर चल रहे थे कि मैच के चौथे दिन 14 मार्च को पहले या दूसरे सत्र में मैच खत्म हो जाएगा क्योंकि भारत इस वक्त भी ऑस्ट्रेलिया की बढ़त से 20 रन पीछे था जबकि उसके मात्र 6 विकेट बचे थे।

लक्ष्मण और द्रविड़ जब क्रीज पर उतरे तो उनके इरादे कुछ और ही थे। इन दोनों ने क्रीज पर ऐसा खूंटा गाड़ा कि कंगारू गेंदबाज दिन भर विकेट के लिए तरसते रहे लेकिन उनकी झोली खाली रही। लक्ष्मण दोहरा शतक और द्रविड़ सेंचुरी बनाकर क्रीज पर जमे रहे। दिन की समाप्ति के समय लक्ष्मण 275 और द्रविड़ 155 रन बनाकर क्रीज पर थे। इन दोनों ने चौथे दिन 335 रन जोड़े।

लक्ष्मण और द्रविड़ ने पांचवें दिन भी साझेदारी को जारी रखा और पांचवें विकेट के लिए कुल 376 रनों की साझेदारी की। लक्ष्मण 281 रन बनाकर आउट हुए, जो उस वक्त भारत की तरफ से किसी बल्लेबाज का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर था। द्रविड़ ने 180 रन बनाए। भारत ने 7 विकेट पर 657 रन बनाकर दूसरी पारी घोषित कर ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 384 का लक्ष्य रखा। इसके बाद हरभजन सिंह की घातक गेंदबाजी (73/6) के सामने मेहमानों की दूसरी पारी 212 रनों पर सिमटी और भारत ने 171 रनों से यादगार जीत दर्ज की।