नई दिल्ली। बीसीसीआई के लोकपाल जस्टिस डीके जैन द्वारा कथित रूप से हितों के टकराव मामले में सौरव गांगुली से लिखित स्पष्टीकरण मांगने के बावजूद बीसीसीआई ने कहा कि इस पूर्व भारतीय कप्तान के मामले को सुलझाया जा सकता हैं।

बंगाल के तीन क्रिकेट प्रेमियों भास्वती शंतुआ, अभिजीत मुखर्जी और रंजीत सिल ने यह आरोप लगाया था कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के अध्यक्ष सौरव गांगुली का बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) और आईपीएल फ्रेंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स के सलाहकार का पद भी संभालना हितों के टकराव के तहत आता हैं।

बीसीसीआई ने कहा कि गांगुली 'हितों के टकराव' में सुविधाजनक कैटेगरी में आते हैं और इस मामले को आसानी से सुलझाया जा सकता है। बीसीसीआई की धारा 38 ए के तहत सुविधाजनक हितों का टकराव आता है जिसमें व्यक्ति को हितों का पूरा खुलासा करना होता है। ऐसा पता चला है कि यदि गांगुली पूरी घोषणा कर देते हैं तो प्रशासकों की समिति (सीओए) नहीं चाहेगा कि उन्हें इस मामले में दंडित किया जाए।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, जब नया संविधान लागू किया गया तो गांगुली ने आईपीएल तकनीकी समिति और शासी निकाय से इस्तीफा दे दिया था। वे अभी भी क्रिकेट सलाहकार समिति के सदस्य है लेकिन इसकी चार साल में सिर्फ दो बार बैठक हुई हैं। हम उन्हें क्रिकेटर के रूप में पेशेवर ड्यूटी करने से कैसे रोक सकते हैं। इस मामले में लोकपाल को फैसला लेने दो क्योंकि यह मामला सुलझाया जा सकता है, यदि गांगुली ने पूरी घोषणा की तो वे तीनों पदों पर बने रह सकते हैं। यदि गांगुली ने सलाहकार समिति से इस्तीफा दिया तो सचिन तेंडुलकर (मुंबई इंडियंस के मेंटर) और वीवीएस लक्ष्मण (सनराइजर्स हैदराबाद के मेंटर) को भी उनका अनुसरण करना पड़ सकता है।