मल्टीमीडिया डेस्क। 24 अप्रैल की तारीख भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए खास है क्योंकि 1973 में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंडुलकर का इसी दिन जन्म हुआ था। दुनियाभर में अपने खेल से विशेष पहचान वाले सचिन आज 46 वर्ष के हो गए। उन्हें क्रिकेट से संन्यास लिए 6 वर्ष हो गए लेकिन उन्होंने इतने रिकॉर्ड बनाए हुए हैं कि क्रिकेट में उनके नाम का उल्लेख लगातार होता ही रहता है।

सचिन की फैन फालोइंग अभी भी बनी हुई हैं और इसी वजह से उनके परिजन भी लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं। सचिन के पिता रमेश तेंडुलकर तो मराठी साहित्यकार होने की वजह से चर्चित थे। जब 1999 में इंग्लैंड में क्रिकेट विश्व कप चल रहा था, उसी दौरान सचिन के पिता रमेश का निधन हो गया था। सचिन पिता के अंतिम संस्कार के लिए भारत लौटे। पिता के निधन के कारण वे टूट चुके थे लेकिन ऐसे कठिन समय में मां रजनी ने उन्हें ढांढस बंधाया और लौटकर विश्व कप में खेलने को कहा।

इंग्लैंड लौटने के साथ ही सचिन ने केन्या के खिलाफ शतक भी लगाया था। सचिन ने भी कहा था, पिता का निधन मेरे लिए सबसे कठिन क्षण था। ऐसे में मां ने समझाया कि मेरे पिता भी यह चाहते कि मैं जाकर विश्व कप में खेलूं। मां ने कहा कि तुम्हें जाकर देश के लिए खेलना चाहिए और उनके इस शब्दों ने मुझे मजबूत बनाया। सचिन के परिवार में एक शख्स ऐसा भी है जो मीडिया की नजरों में यदाकदा ही आया। हम यहां बात कर रहे हैं सचिन की मां रजनी तेंडुलकर की।

रजनी तेंडुलकर ने अपने करियर की शुरुआत एलआईसी एजेंट के रूप में की थी और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सचिन के क्रिकेट स्टार बनने के बावजूद रजनी रिटायरमेंट तक जॉब करती रही। वे जिस दिन रिटायर हुई उस दिन अपने साथियों के अनुरोध पर बेटे सचिन और बहू अंजलि को लेकर ऑफिस गई थी। वैसे सचिन जब छोटा था तब वे उसे लेकर कई बार ऑफिस जाती थी।

सचिन का इंटरनेशनल क्रिकेट करियर 24 साल का रहा लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उनकी मां ने कभी उनको स्टेडियम में इंटरनेशनल मैच खेलते नहीं देखा। सचिन ने अपना विदाई मैच 2013 में मुंबई में खेला और इस दौरान उनके विशेष अनुरोध पर मां रजनी पहली बार स्टेडियम पहुंची। यह सचिन का 200वां टेस्ट मैच था। मां को चलने में परेशानी थी इसलिए वानखेडे स्टेडियम में रैम्प बनाया गया और वे व्हीलचेयर पर बैठकर मैच देखने पहुंची। रजनी अपने बेटे सचिन को टीवी पर खेलते हुए देखा करती थी। वे बेटे के मैच के दौरान तनाव में आ जाती थी इसलिए मैच देखने कभी स्टेडियम नहीं गई।