मल्टीमीडिया डेस्क। ऑस्ट्रेलिया ने सबसे ज्यादा पांच बार विश्व कप खिताब अपने नाम किया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम को बुलंदियों तक पहुंचाने में तेज गेंदबाज ग्लेन मॅक्ग्राथ की अहम भूमिका रही हैं। मॅक्ग्राथ का प्रदर्शन वर्ल्ड कप में भी शानदार रहा है और क्रिकेट महाकुंभ के उनके नाम दर्ज दो खास रिकॉर्ड्स को इस बार भी कोई खतरा नजर नहीं आ रहा हैं।

वर्ल्ड कप में एक मैच में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन करने का रिकॉर्ड मॅक्ग्राथ ने 2003 वर्ल्ड कप में किया था। उन्होंने पोचेफ्स्ट्रूम में 27 फरवरी को नामीबिया के खिलाफ मैच में मात्र 15 रन देकर 7 विकेट झटके थे। यह रिकॉर्ड 16 साल बाद अभी बरकरार है। वैसे मॅक्ग्राथ के इस रिकॉर्ड पर कुछ दिनों बाद ही खतरा मंडराया था जब उनके साथी गेंदबाज एंडी बिकेल ने 2 मार्च को पोर्ट एलिजाबेथ में इंग्लैंड के खिलाफ 20 रनों पर 7 विकेट लिए थे।

मॅक्ग्राथ ने वेस्टइंडीज के विंस्टन डेविस के 20 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा था। डेविस ने 11 जून 1983 को लीड्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 51 रन देकर 7 विकेट लिए थे। वैसे तो पिछले विश्व कप (2015) में भी एक गेंदबाज ने 7 विकेट लिए थे, लेकिन उसने बहुत ज्यादा रन लुटाए थे। सह मेजबान न्यूजीलैंड के टिम साउदी ने 20 फरवरी 2015 को वेलिंगटन में इंग्लैंड के खिलाफ 33 रनों पर 7 शिकार किए थे।

इस बार वर्ल्ड कप इंग्लैंड और वेल्स में होने जा रहा है जहां की पिचें पिछले कुछ सालों से बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती हैं। इन पिचों पर बल्लेबाज रनों की फसल काटते हैं, इसलिए इस पिच पर कोई गेंदबाज 8 विकेट ले या फिर 15 से कम रन देकर 7 विकेट ले इसकी संभावनाएं कम नजर आती हैं। इसलिए मॅक्ग्राथ के रिकॉर्ड को कोई खतरा नहीं हैं।

सबसे ज्यादा विकेट भी मॅक्ग्राथ के नाम :

वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड भी मॅक्ग्राथ के नाम पर हैं। मॅक्ग्राथ ने 1996 से 2007 के बीच 39 मैचों में 18.19 की औसत से 71 विकेट हासिल किए हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 15 रनों पर 7 विकेट रहा है। वर्तमान विश्व कप में खेल रहे गेंदबाजों में सबसे ज्यादा विकेट श्रीलंका के लसिथ मलिंगा के नाम हैं। 35 वर्षीय मलिंगा 22 मैचों में 21.11 की औसत से 43 विकेट ले चुके हैं।

उन्हें मॅक्ग्राथ को पीछे छोड़ने के लिए 29 विकेट लेने होंगे। मलिंगा की काबिलियत को देखते हुए यह काम असंभव तो नहीं माना जा सकता है लेकिन उनकी उम्र, वर्ल्ड कप से ठीक पहले उन्हें कप्तानी से हटाया जाना और श्रीलंका की कमजोर टीम ऐसे कारण है जिसके चलते उनके लिए यह काम आसान नहीं होगा।